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तीन देशों के दौरे में भारत की कूटनीतिक जीत, अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन बोलीं-दुनिया कर रही पीएम मोदी का सम्मान

वाशिंगटन। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों का छह दिवसीय दौरा पूरा कर चुके हैं। तीनों देशों के दौरे पर पीएम मोदी को भरपूर सम्मान मिला। तीन देशों के दौरे पर पीएम मोदी को मिले सम्मान को लेकर अमेरिका की मशहूर सिंगर मैरी मिलबेन ने खुशी जाहिर की है।

मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “इंडोनेशिया से लेकर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक, मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि दुनिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्मान कर रही है और बिजनेस करने के लिए भारत को सबसे अच्छी जगह के तौर पर चुन रही है! जय हिंद।”

बता दें, पीएम मोदी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर थे। इंडोनेशिया में प्रधानमंत्री को सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद ऐलान किया कि ऑस्ट्रेलिया भारतीय परमाणु रिएक्टरों को यूरेनियम देगा।

दरअसल, जनवरी 2008 में भारत के विशेष दूत एक अरब से अधिक आबादी वाले ऊर्जा संकट से जूझ रहे देश के लिए यूरेनियम की मांग लेकर उस देश के पास पहुंचे जिसके पास दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में से एक है। हांलाकि तब भारत से कहा गया, ‘पहले परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करें, वरना वापस जाएं।

हालांकि, इस बार कोई उपदेश नहीं, कोई शर्त नहीं, भारत द्वारा दशकों से सम्मानपूर्वक अस्वीकार की गई संधि पर हस्ताक्षर करने की मांग नहीं। केवल एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में भारत को सम्मान दिया गया।

2006 में जब अमेरिका भारत के साथ नागरिक परमाणु सहयोग को आगे बढ़ा रहा था, तब ऑस्ट्रेलिया ने इसका समर्थन नहीं किया। 2008 में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहले की सैद्धांतिक सहमति से भी पीछे हट गया। पूरे यूपीए शासनकाल में यही स्थिति बनी रही। दिल्ली ने आग्रह किया लेकिन कैनबरा ने इनकार किया। हैरानी की बात यह थी कि ऑस्ट्रेलिया लोकतांत्रिक भारत को यूरेनियम देने से इनकार करते हुए चीन को इसकी बिक्री पर चर्चा करता रहा।

जब यूपीए सरकार सत्ता से बाहर हुई, तब तक ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम की भारत तक कानूनी आपूर्ति का कोई रास्ता नहीं बना था। सत्ता संभालने के लगभग 100 दिनों के भीतर प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर 2014 में लंबे समय से लंबित नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इस सप्ताह मेलबर्न में अंतिम प्रशासनिक बाधा भी दूर हो गई और आपूर्ति शुरू हो गई, जो भारत के 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की दिशा में एक कदम है।

इसके अलावा, भारत और इंडोनेशिया ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति के लिए समझौते किए। इसके साथ इंडोनेशिया फिलीपींस और वियतनाम के बाद तीसरा देश बन गया जिसने भारतीय रक्षा तकनीक पर भरोसा जताया। वहीं ‘अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली’ से संबंधित समझौते भी हुए।

ब्रह्मोस की विश्वसनीयता उसके वास्तविक युद्ध अनुभव से जुड़ी है। दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने बदलते सुरक्षा माहौल को देखते हुए भारतीय रक्षा क्षमता को चुना। यह केवल एक सौदा नहीं बल्कि एक भरोसे और विश्वास का संकेत है।

ऑकलैंड में पारंपरिक ‘माओरी पोविरी’ स्वागत समारोह के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने नई रणनीतिक साझेदारी और 2030 रोडमैप की घोषणा की, जिसमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर रक्षा, 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर के व्यापार लक्ष्य और भारतीय नौसेना तथा न्यूजीलैंड रक्षा बल के बीच लॉजिस्टिक्स समझौता शामिल है।

अब भारतीय नौसेना का जहाज ऑकलैंड में सहायता और आपूर्ति प्राप्त कर सकता है। यह दर्शाता है कि भारत की समुद्री साझेदारी का विस्तार हिंद महासागर से दक्षिण प्रशांत तक हो रहा है।

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