IGRS समीक्षा में खुली विभागीय लापरवाही की परतें, कई अधिकारियों का प्रदर्शन शून्य प्रतिशत

- IGRS समीक्षा में खुली विभागीय लापरवाही की परतें, कई अधिकारियों का प्रदर्शन शून्य प्रतिशत
गौरव कुशवाहा
देवरिया। जन शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) की समीक्षा बैठक ने जनपद के प्रशासनिक अमले की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार को आयोजित समीक्षा में कई विभागों के प्रदर्शन को निराशाजनक ही नहीं, बल्कि घोर लापरवाहीपूर्ण पाया गया, जिससे आम जनता की शिकायतों के प्रति शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन)/ नोडल अधिकारी आईजीआरएस जैनेंद्र सिंह ने समीक्षा के दौरान कई विभागों की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जाहिर की। रिपोर्ट के अनुसार, खंड विकास अधिकारी तरकुलवा, पथरदेवा, बरहज, बैतालपुर, भटनी और लार के अलावा चकबंदी अधिकारी सलेमपुर व प्रथम, जिला विद्यालय निरीक्षक, तथा पंचायत विभाग के अधीन तरकुलवा, देवरिया सदर, रामपुर कारखाना और सलेमपुर के सहायक विकास अधिकारियों का संतोषजनक निस्तारण शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया।
इसी तरह अन्य विभागों का भी हाल बेहाल रहा प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता और खान निरीक्षक का प्रदर्शन महज 14 प्रतिशत, सीएमओ का 25 प्रतिशत, एसडीएम बरहज का 37 प्रतिशत, जिला पंचायत राज अधिकारी का 50 प्रतिशत तथा अन्य अधिकारियों का प्रदर्शन औसत से भी नीचे पाया गया।
समीक्षा बैठक में एडीएम जैनेंद्र सिंह ने यह स्पष्ट निर्देश दिए कि आईजीआरएस मामलों का निस्तारण सिर्फ आंकड़ेबाज़ी न होकर गुणवत्ता के आधार पर, स्थलीय सत्यापन और आवेदक की संतुष्टि के साथ किया जाना चाहिए। बिना जांच के फीडबैक प्राप्त करना या केवल खानापूर्ति कर रिपोर्ट अपलोड करना अब अनुशासनहीनता की श्रेणी में आएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि सभी अधिकारी प्रकरणों में सीधे आवेदकों से संपर्क करें, निस्तारण रिपोर्ट में साक्ष्य स्वरूप फोटो संलग्न करें, और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही मिली, तो सीधी जवाबदेही तय करते हुए विभागीय कार्यवाही की जाएगी।



