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Women’s Reservation Bill पर सियासी घमासान तेज, सत्तारूढ़ दल का सपा-कांग्रेस पर तीखा प्रहार, विपक्ष भी लगातार हमलावर

लखनऊः देश में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पारित न होने पर सियासी घमासान तेज हो गया है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर हमले तेज कर दिए हैं, जबकि विपक्षी दलों ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए उसे कटघरे में खड़ा किया है। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के संसदीय चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया।

भाजपा नेता और राज्‍य महिला आयोग की उपाध्‍यक्ष अपर्णा यादव ने शुक्रवार देर रात विधानभवन के सामने पहुंचकर सपा और कांग्रेस का झंडा जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। चूंकि अपर्णा समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मुलायम सिंह यादव की छोटी पुत्रवधू हैं, इसलिए भी उनके इस प्रतिरोध से सियासी पारा चढ़ गया। सपा ने उन पर तीखे तंज कसे हैं।

अपर्णा यादव ने विधानभवन के सामने ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में कहा, ”विधेयक को लेकर विपक्ष ने जिस तरह का कृत्य किया है, नारी शक्ति इन्हें कभी माफ नहीं करेगी।” यादव ने कहा, ”2003 में भी यही हुआ और 2026 में भी यही हुआ, यह चाहते ही नहीं है कि विधेयक पारित हो और महिलाएं निकल कर आगे आएं।”

भाजपा नेता ने कहा, ”इन दलों में जो लोग दुर्योधन और दु:शासन की तरह मानसिकता रखते हैं, इस काली रात में मैं इनके झंडे जलाकर नारी अस्मिता की ज्योति जलाने आई हूं।” यादव ने कहा, ”अगर आज मैं चुप बैठ जाती तो मेरी अंतरात्मा मुझे कभी माफ नहीं करती, यह आधी आबादी की पीड़ा है। विपक्ष ने नारी शक्ति को कुचलने का काम किया है।”

वहीं, सपा के पूर्व विधान परिषद सदस्य और प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में अपर्णा यादव का वीडियो साझा करते हुए कहा, ”कैकई, मंथरा और शकुनि की परंपरा के लोग कृष्ण वंशियों को ज्ञान ना दे। सब जानते-समझते हैं, इस नौटंकी और फ्रॉड गिरी को।”

बहरहाल, समाजवादी पार्टी ने शनिवार को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के हवाले से कहा, ”हमारी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है। हमने कभी इसका विरोध नहीं किया बल्कि उन लोगों को रोका जो महिलाओं के अधिकार छीनना चाहते थे।”

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ”मोना” ने पत्रकारों से संशोधन विधेयक गिरने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि महिला आरक्षण परिसीमन संविधान पर बहुत बड़ा प्रहार था, लेकिन इस जीत से संविधान की रक्षा हुई है। उन्होंने कहा, ”कांग्रेस हमेशा महिला आरक्षण के पक्ष में रही है, लेकिन ढाई साल पहले मंजूर हुए विधेयक की सरकार ने अधिसूचना तक जारी नहीं की।”

मिश्रा ने सत्तारूढ़ दल की नीयत पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सरकार अगर संसद में मौजूदा सीटों पर ही आरक्षण लागू कर दे तो पूरा विपक्ष इसके लिए तैयार है।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”सदन में आज सिर्फ एक विधेयक नहीं गिरा…देश की आधी आबादी के सपनों, उम्मीदों और हक को कुचला गया है। नारी शक्ति इसका हिसाब जरूर लेगी।”

लोकसभा में ‘संविधान (131 वां) संशोधन विधेयक 2026’ पर मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। विधेयक पर मत विभाजन में 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस विधेयक को पारित करने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत के हिसाब से 352 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी।

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