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मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, याचिका खारिज, कहा- ये मामला सुनवाई योग्य नहीं है

कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को अब सुप्रीम झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में मीनाक्षी नटराजन हाईकोर्ट जा सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि ये मामला सुनवाई योग्य नहीं है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में मीनाक्षी नटराजन की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। सिंघवी ने कहा कि कानून साफ है जब तक आरोप तय न हो, तब तक नामांकन पत्र में घोषणा करना जरूरी नहीं। सिंघवी ने इसके लिए इंदिरा गांधी बनाम राजनारायण केस का भी जिक्र किया और कहा कि चुनाव के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड होना चाहिए जो कि इसमें नहीं बरता गया। उन्होंने अदालत में हुई सुनवाई में देरी को लेकर भी सवाल उठाया।

‘मुझे अदालत में सुना नहीं गया’

सिंघवी ने कहा कि, वो चुनाव आयोग गए और एक घंटे तक दलीलें दीं, वह संविधान का संरक्षक है और फिर भी चुप है, यह निंदनीय है। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि कल मुझे अदालत में सुना नहीं गया। इसका नतीजा ये हुआ कि कोई चुनाव नहीं हुआ और दूसरा प्रत्याशी निर्विरोध चुनाव जीत गया।

बता दें कि नटराजन ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को गलत, पक्षपातपूर्ण और कानून के विरुद्ध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से उसे तत्काल निरस्त करने की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान किसने क्या कहा?

  • अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जांच करने पर पता चला कि एक प्राइवेट शिकायत के तौर पर केस नंबर, दर्ज किया गया है और कोर्ट ने उस पर संज्ञान लिया है, लेकिन कहां? सिर्फ़ नोटिस जारी हुआ है, संज्ञान कहां लिया गया है? क्या समन जारी करना ही संज्ञान लेना है?
  • जस्टिस मिश्रा ने कहा- आपकी दिक्कत यह नहीं है।
  • सिंघवी ने कहा- मेरे पास संवैधानिक बेंच के फैसले हैं जो मेरे पक्ष में हैं, कोई आरोप तय नहीं किए गए हैं, तो उन्हें यह जानकारी क्यों देनी चाहिए? अगर कोई आपराधिक मामला लंबित होता, तो एक उम्मीदवार के तौर पर उन्हें यह बताना पड़ता। मैं चुनाव आयोग गया और एक घंटे तक दलीलें दीं, वह संविधान का संरक्षक है और फिर भी चुप है, यह निंदनीय है।
  • सिंघवी– कल मुझे अदालत में सुना नहीं गया। इसका नतीजा ये हुआ कि कोई चुनाव नहीं हुआ और दूसरा प्रत्याशी निर्विरोध चुनाव जीत गया। इंदिरा गांधी बनाम राजनारायण में ये साफ हुआ था कि चुनाव के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड होना चाहिए।
  • सिंघवी– चुनावी प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की जगह उसे इस चुनाव में खत्म किया गया।
  • सिंघवी ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के दलीलें रखने पर विरोध किया। क्योंकि केंद्र सरकार इसमें पक्षकार नहीं हैं।
  • चुनाव आयोग के वकील वी. एस. नायडू– मीनाक्षी नटराजन चुनाव आयोग गई थी लेकिन आयोग ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता था। RO ने RP एक्ट के मुताबिक ही बीजेपी के उम्मीदवार को विजेता घोषित किया है।

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की इकलौती उम्मीद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन एक बड़े कानूनी विवाद में फंसने के बाद रद्द हो गया। जानकारी छिपाने के आरोप में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुातबिक, नटराजन ने अपने नामांकन फॉर्म में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई थी। 11 जून तक नाम वापसी की आखिरी तारीख थी ऐसे में चुनाव आयोग ने बीजेपी के तीनों राज्यसभा कैंडिडेट को विजयी घोषित कर दिया।

प्राप्त अदालती दस्तावेजों ने इस पूरे घटनाक्रम की जो टाइमलाइन उजागर की है, उसने कांग्रेस खेमे में भूकंप ला दिया है। नटराजन का नामांकन रद्द होना पार्टी के लिए बड़ा झटका है। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने की वजह से BJP के महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं।

कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मिलने का वक्त मांगा

जबकि कांग्रेस पार्टी ये मांग कर रही थी कि अभी तुरंत तीनों उम्मीदवारों को विजयी घोषित नहीं किया जाए। कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने कल सुप्रीम कोर्ट से भी तुरंत सुनवाई की अपील की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई की जगह आज की तारीख तय की। उधर, कांग्रेस अब इस मामले को सड़क पर ले जाने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस पार्टी ने आज राष्ट्रपति से मिलने का वक्त मांगा है। कांग्रेस आज मध्य प्रदेश के अपने विधायकों के साथ राष्ट्रपति भवन तक मार्च कर सकती है।

मीनाक्षी नटराजन ने क्या कहा?

वहीं, सुनवाई से पहले इस पर मीनाक्षी नटराजन ने कहा, ”मामला न्यायाधीन है इसलिए विस्तार से इस लीगल बात नहीं करूंगी। मुझ पर फॉर्म 26 में जानकारी छुपाने का आरोप लगा है। कोई जानकारी छुपाई नहीं गई।”

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