
चंडीगढ़, 23 सितंबर:
पंजाब सरकार की बाल-केंद्रित और संवेदनशील सोच का एक और प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां सड़कों पर असुरक्षित परिस्थितियों में जीवन बिता रही एक नन्ही बच्ची को अब एक प्यार भरे और सुरक्षित परिवार की छांव मिल गई है। कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया के माध्यम से यह बच्ची अब अपने जीवन के एक नए अध्याय में प्रवेश कर चुकी है, जहां उसे प्यार, स्नेह, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की संभावनाएं मिलेंगी।
पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार का उद्देश्य केवल बच्चों को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकालना ही नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन, सुरक्षित भविष्य और पारिवारिक प्यार का एहसास करवाना भी है।
उन्होंने कहा कि कोई भी बच्चा गरीबी, बेसहारा होने या परिस्थितियों का शिकार होकर अपने बचपन से वंचित न रहे, यह पंजाब सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। सरकार द्वारा मजबूत बाल संरक्षण प्रणाली के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को देखभाल, पुनर्वास और जीवन में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
मामले की जानकारी देते हुए डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि वर्ष 2019 में जन्मी इस बच्ची को 19 नवंबर 2024 को पटियाला के लीला भवन क्षेत्र से ‘जीवनजोत 2.0’ अभियान के तहत रेस्क्यू किया गया था। यह अभियान सड़कों पर भीख मांगने वाले बच्चों की पहचान करके उन्हें सुरक्षा, देखभाल और उचित पुनर्वास उपलब्ध करवाने के लिए चलाया जा रहा है।
रेस्क्यू के बाद जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU), पटियाला द्वारा बच्ची को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बाल कल्याण समिति (CWC), पटियाला के समक्ष पेश किया गया। समिति के आदेशों के अनुसार उसे विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी (SAA) में देखभाल और सुरक्षा के लिए रखा गया, जहां उसे काउंसलिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, भावनात्मक सहयोग और प्यार भरा वातावरण प्रदान किया गया।
मंत्री ने बताया कि सामाजिक जांच और काउंसलिंग की प्रक्रिया के दौरान यह सामने आया कि बच्ची की देखभाल और सुरक्षा के लिए कोई योग्य जैविक रिश्तेदार उपलब्ध नहीं था। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए 4 जून 2026 को बाल कल्याण समिति द्वारा बच्ची को गोद लेने के लिए कानूनी रूप से मुक्त घोषित किया गया।
इसके बाद निर्धारित दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के माध्यम से योग्य भावी दत्तक माता-पिता (Prospective Adoptive Parents) के साथ बच्ची का मिलान किया गया और 27 जुलाई 2026 को उसे प्री-अडॉप्शन फोस्टर केयर में रखा गया। सभी कानूनी कार्रवाई पूरी होने के बाद 22 सितंबर 2026 को सक्षम प्राधिकारी द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया को अंतिम मंजूरी दे दी गई।
डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि बच्चे को बचाना केवल पहला कदम है; वास्तविक उद्देश्य उसके बचपन को फिर से संवारना, उसके सपनों को नई उड़ान देना और उसे एक सुरक्षित पारिवारिक वातावरण उपलब्ध करवाना है।
उन्होंने स्टेट अडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी (SARA), जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU), बाल कल्याण समिति (CWC), विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी (SAA), काउंसलरों और गोद लेने से जुड़ी सभी संस्थाओं के प्रयासों की सराहना की, जिनके संयुक्त प्रयासों से बच्ची को नया जीवन मिला।
डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि विभाग द्वारा बाल संरक्षण सेवाओं को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि हर जरूरतमंद बच्चे को समय पर देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास मिल सके।
“किसी भी बच्चे का भविष्य उसकी मजबूरियों या परिस्थितियों से तय नहीं होना चाहिए। हमारी जिम्मेदारी केवल बच्चे को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे प्यार, सुरक्षा और अवसरों से भरपूर जीवन देना है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार हर उस बच्चे के साथ खड़ी है, जिसे सहारे और देखभाल की जरूरत है,” डॉ. बलजीत कौर ने कहा।
यह सफल दत्तक ग्रहण की कहानी इस बात का प्रतीक है कि संवेदनशील सोच, प्रभावी प्रणाली और समय पर की गई पहल किसी भी बच्चे के जीवन को नई दिशा दे सकती है।



