पंजाबराज्य

पंजाब कला परिषद द्वारा पूर्व सांसद तरलोचन सिंह को दिया गया पहला यादगारी ‘गुरमति रतन’ अवार्ड

चंडीगढ़, 15 जुलाई:

पंजाब कला परिषद द्वारा पद्म श्री डॉ. रतन सिंह जग्गी मेमोरियल चैरिटेबल फाउंडेशन के सहयोग से पहला यादगारी ‘गुरमति रतन’ अवार्ड सरदार तरलोचन सिंह, पूर्व सांसद को प्रदान किया जा रहा है। उन्हें 51,000/- रुपये, दुशाला तथा स्मारक चिह्न प्रदान किए जाएंगे। अवार्ड संबंधी जूरी सदस्य डॉ. बलकार सिंह, डॉ. निवेदिता सिंह, डॉ. आतम रंधावा और श्री मलविंदर सिंह जग्गी थे।

सरदार तरलोचन सिंह, पूर्व सांसद ने हर मंच पर गुरमति सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने तथा संपूर्ण विश्व में गुरमत सिद्धांतों का संदेश पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पंजाब कला परिषद के ओपन एयर थिएटर का नवीनीकरण कार्य भी इस ट्रस्ट द्वारा डॉ. रतन सिंह जग्गी के पुत्र मलविंदर सिंह जग्गी द्वारा करवाया जा रहा है। यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष गुरमति सिद्धांतों के क्षेत्र में किसी प्रतिष्ठित व्यक्तित्व को प्रदान किया जाएगा।

पूर्व सांसद तरलोचन सिंह एक प्रतिष्ठित सिख नेता, समाजसेवी और शिक्षाप्रेमी है । वह 2004 से 2010 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। इससे पहले वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दे चुके थे। उन्होंने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा, धार्मिक सद्भाव और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। सिख विरासत, शिक्षा और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए उनका योगदान सदैव याद किया जाता है । सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के प्रति समर्पण के कारण तरलोचन सिंह को देश भर में एक सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है।

प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. रतन सिंह जग्गी का नाम पंजाबी-हिंदी तथा गुरमति एवं भक्ति आंदोलन साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वानों/विशेषज्ञों में गिना जाता है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मध्यकालीन साहित्य का विभिन्न दृष्टिकोणों से अध्ययन करने तथा सिख गुरु साहिबान की बाणी और भक्ति आंदोलन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर शोध करने के लिए समर्पित करके उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके प्रमुख कार्यों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब और श्री दशम ग्रंथ साहिब की हिंदी और पंजाबी में संपूर्ण व्याख्या, गुरु नानक बाणी की व्याख्या, श्री गुरु ग्रंथ साहिब विश्वकोश, सिख पंथ विश्वकोश, तुलसी रामायण का पंजाबी में लिप्यंतरण एवं अनुवाद, पंजाबी साहित्य का स्रोत मूलक इतिहास सहित लगभग 150 पुस्तकें शामिल हैं। वर्ष 2023 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनकी सेवाओं के लिए ‘पद्म श्री’ सम्मान से सम्मानित किया गया।

उन्हें साहित्य अकादमी, दिल्ली का राष्ट्रीय पुरस्कार तथा पंजाब सरकार का सर्वोच्च सम्मान “पंजाबी साहित्य शिरोमणि पुरस्कार” और कई अन्य उच्च स्तरीय सम्मान/पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव भी प्राप्त है।संक्षेप में, डॉ. रतन सिंह जग्गी का साहित्य के क्षेत्र में योगदान वास्तव में अत्यंत उत्कृष्ट स्तर का है और निस्संदेह वे साहित्य जगत के अनमोल रत्न थे तथा उनकी सेवाओं की निशानियाँ संपूर्ण मानव जाति की विरासत का सदैव महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहेंगी।

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