उत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

इंडियन आर्मी में अग्निवीर बनने के लिए मैदान में दमखम दिखाने उतरीं बेटियां, हौसला और जुनून देखकर हर कोई रह गया दंग

लखनऊः भारतीय सेना (Indian Army) का हिस्सा बनकर देश की सरहदों की रक्षा करने को बेताब बेटियां बुधवार को अपने दमखम और हौसलों का इम्तिहान देने मैदान पर उतरीं। भर्ती स्थल-लखनऊ के एएमसी सेंटर एंड कॉलेज स्टेडियम का माहौल जोशीला हो गया। साहस, गौरव और जुनून का खुशनुमा वातावरण था। यूपी और उत्तराखंड के गांव-कस्बों से करीब 1000 महिला कैंडिडेट्स अग्निवीर महिला (Mahila Agniveer) मिलिट्री पुलिस भर्ती के लिए शॉर्टलिस्ट हुईं थीं। शारीरिक दक्षता परीक्षा में कोई 410 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। पिछले साल जुलाई में ऑनलाइन कॉमन एंट्रेंस एग्जाम पास करने के बाद ये कैंडिडेट्स आगे की प्रक्रिया में हिस्सा लेने आई थीं।

सुबह से ही मैदान पर उत्साह का माहौल हो गया। आठ मिनट में 1.6 किलोमीटर (1600 मीटर) की दौड़ करने का टारगेट था। चार 400 मीटर के राउंड में अभ्यर्थियों ने पूरा दमखम झोंक दिया। कई ने लक्ष्य हासिल किया, तो कुछ लड़खड़ाकर गिरीं पड़ीं, हालांकि हिम्मत नहीं हारी और फिर उठकर दौड़ने लगीं। सेना में भर्ती होने का उनका ये जुनून देखने लायक था। अधिकारी भी ये जज्बा देखकर प्रभावित नजर आए।

दौड़ के बाद क्वालीफाई करने वाली कैंडिडेट्स हाई जंप (3 फीट) और लॉन्ग जंप (10 फीट) में उतरीं, जहां एक बार क्वालीफाई न कर पाने वाली कैंडिडेट्स को तीन-तीन प्रयास मिले। सफल अभ्यर्थियों के दस्तावेज चेक होने के बाद मेडिकल टेस्ट होगा और अंत में मेरिट लिस्ट से सेना में अग्निवीर महिला सैन्य पुलिस के रूप में चयन हो जाएगा।

हालांकि, कड़ी मेहनत के बीच कुछ युवतियों की तबीयत बिगड़ गई। कुछ तो मैदान पर गश खाकर गिर पड़ीं। मेडिकल सेवाएं उपलब्ध दी थीं। ऐसी अभ्यर्थियों को फौरन अस्पताल भेजा गया। बाद में अधिकारियों ने उन्हें हिम्मत दी। हौसले को सराहा और दोबारा प्रयास करने का संदेश दिया। भर्ती न हो पाने से कुछ अभ्यर्थी निराश होने लगीं, लेकिन उन्हें भी हिम्मत देकर भेजा गया।

मध्य कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने कहा कि 2019 में मंजूरी मिलने के बाद से कोर ऑफ सैन्य पुलिस (सीएमपी) की शाखा में महिलाओं की भर्ती भारतीय सेना में एक महत्वपूर्ण संस्थागत परिवर्तन को दर्शाती है, जो आधुनिक सैन्य व्यवस्था और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि सीएमपी में महिलाओं की भर्ती से जेंडर सेंसिटिव स्थितियों से निपटने में सुधार होता है, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बढ़ती है और यह तकनीकी रूप से सक्षम और सामाजिक रूप से प्रतिनिधि बल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने भारतीय सेना में महिलाओं के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण एवं सुरक्षा में उनकी भागीदारी एक परिचालन आवश्यकता और दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश है।

इस बार भर्ती प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी का जबरदस्त इस्तेमाल हुआ, जो इसे पूरी तरह पारदर्शी बनाता है:

– गेट पर रिस्ट बैंड दिया गया, जिसमें यूनिक नंबर दर्ज था।
– अभ्यर्थियों को आर्मी की ओर से यूनिक नंबर वाली टी-शर्ट प्रदान की गई।
– स्टॉपवॉच की जगह डिजिटल क्लॉक लगाई गई, जो सीसीटीवी कैमरों से जुड़ी हुई थी। पूरे ग्राउंड पर कुल 50-60 कैमरे लगे हुए थे।
– अगर किसी को टाइमिंग पर संदेह हो, तो रिकॉर्डिंग दिखाकर साफ किया जा सकता है, जिससे ट्रांसपेरेंसी पर कोई कोई सवाल नहीं उठा सके।

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