उत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

कुपोषण के खिलाफ जीवनरक्षक ढाल बना योगी सरकार का ‘संभव अभियान’

लखनऊ। कुपोषण और भुखमरी दूर करने के लिए योगी सरकार की प्रतिबद्धता का ही परिणाम है कि प्रदेश में लाखों नौनिहालों की जान बचाने में सफलता मिली है। ‘संभव अभियान’ से अति गंभीर कुपोषित (सैम) बच्चों में से 81 प्रतिशत सामान्य स्थिति में आ चुके हैं। यह एक समग्र प्रयास है जो जीवन के पहले 1000 दिनों में कुपोषण की रोकथाम, समय पर पहचान और प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करता है।

बच्चों को मिल रहा है पोषण और जीवनदान
प्रदेश में बड़ी संख्या में बच्चे तीव्र कुपोषण से जूझ रहे थे, जिससे उनके जीवन और विकास पर खतरा मंडरा रहा था। सरकार ने इस समस्या को बड़ी चुनौती के रूप में लिया और केंद्र सरकार की मदद से इस पर व्यापक रणनीति बनाई। संभव अभियान को मजबूत करने में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1.89 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस का उपयोग और पोषण ट्रैकर का कार्यान्वयन सुनिश्चित किया गया। पंजीकृत कुपोषित बच्चों का डाटा स्वास्थ्य विभाग के ई-कवच एप्लीकेशन से जोड़ा गया, जिससे उपचार और फॉलोअप में पारदर्शिता आई। 1.7 करोड़ से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग कर 2.5 लाख कुपोषित बच्चों का पंजीकरण किया गया। एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और एएनएम को प्रशिक्षित कर जमीनी स्तर पर क्षमता बढ़ाई गई। इस तरह बच्चों को उचित पोषण पहुंचाकर विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल रही है।

मां और शिशु पर विशेष फोकस
सम्भव अभियान केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि गर्भावस्था से ही पोषण सुरक्षा की नींव रखता है। कम वजन और एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं की पहचान कर प्रारंभिक पंजीकरण, नियमित वजन निगरानी, आयरन फोलिक एसिड और कैल्शियम सेवन तथा पोषण परामर्श सुनिश्चित किया जा रहा है। 0 से 6 माह तक के शिशुओं में लो बर्थ वेट और प्री-टर्म बच्चों की पहचान कर विशेष निगरानी की जाती है। जटिल मामलों को पोषण पुनर्वास केंद्रों में रेफर कर समुचित उपचार दिया जाता है। यह समन्वित दृष्टिकोण कुपोषण की जड़ पर प्रहार करता है। हर वर्ष जून से सितंबर तक प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में सघन अभियान चलाकर बच्चों की स्क्रीनिंग, पहचान और उपचार की समग्र व्यवस्था की जाती है।

राष्ट्रीय स्तर पर बना आदर्श मॉडल
सम्भव अभियान के परिणाम अब जमीन पर दिख रहे हैं। कुपोषित श्रेणी के बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने की दर में दिनोंदिन वृद्धि हो रही है। यह राज्य के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। सम्भव अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक आंदोलन है जो पोषण के प्रति समुदाय, सेवा प्रदाताओं और नीति निमार्ताओं को एकजुट करता है।

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