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आर्य समाज अनाथालय बंद, 350 करोड़ की जमीन पर भू माफियाओं की नज़र

ख्वाजा एक्सप्रेस संवाददाता


बरेली। बरेली का आर्य समाज अनाथालय जहां अनाथ अपना आश्रय पाते थे। क्या वह अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा। जून में अनाथालय को बंद करने की तैयारी चल रही है। अनाथालय प्रबंधन कमेटी के पास बजट नहीं है। लेकिन वह गुरुकुल बनाने का दावा कर रहे हैं। हालांकि शहर के बीचो-बीच वेशकीमती 350 करोड़ की 42 बीघा जमीन पर भूमाफियाओं की नजर है आर्य समाज अनाथालय में पहले 80-90 अनाथ बच्चों की परवरिश होती थी, लेकिन अब यहां सिर्फ तीन अनाथ लड़कियां ही रह गई हैं। इन्हें भी 30 जून तक अनाथालय खाली करने की अंतिम चेतावनी दे दी गई है।

मानसिक दबाव बनाने के लिए इनसे बाकायदा एग्रीमेंट भी करा लिया गया है। वार्डन समेत 12-13 लोगों के बाकी स्टाफ को फरवरी में ही हटा दिया गया था। अनाथालय को बंद करने के साथ यहां गुरुकुल शुरू करने का पूरा फैसला अनाथालय प्रबंध कमेटी की ओर से ही लिया गया है। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि 42 बीघा क्षेत्रफल में गुरुकुल स्थापित करने के लिए बजट के नाम पर फिलहाल प्रबंध कमेटी के पास कुछ नहीं है। बजट के इंतजार में कब तक यह जमीन खाली पड़ी रहेगी और फिर उस पर गुरुकुल ही शुरू होगा या कुछ और, यह ऐसा सवाल है जिसका कोई स्पष्ट जवाब अभी किसी के पास नहीं है।

पीलीभीत रोड पर सनराइज एन्क्लेव में भी अनाथालय की तीन सौ गज जमीन है। इसके अलावा चाहबाई में करीब एक बीघा और नौमहला मस्जिद के पास करीब एक बीघा जमीन है जो अनाथालय को दान की गई थी। शहर और शहर से बाहर भी अनाथालय की कई और भू संपत्तियां बताई जाती हैं जो करोड़ों की कीमत की हैं। सारी भूसंपत्तियां लोगों ने अनाथालय में बेघर बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए इस संस्था को दान की थीं लेकिन अब अनाथालय प्रबंधन ने अनाथालय का अस्तित्व ही खत्म करने की तैयारी शुरू कर दी है।

अनाथालय को बंद करके गुरुकुल शुरू करने की योजना पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। बजट के इंतजाम के बगैर गुरुकुल बनाने की योजना को क्रियान्वित करने पर तो सवाल है साथ यह भी कहा जा रहा है कि जो कमेटी अनाथालय को बंद करने जा रही है, उसे अनाथालय के लिए ही चुना गया था। जब
अनाथालय नहीं रहेगा तो कमेटी और उसके निर्णय कैसे मान्य हो सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि कमेटी के पास अनाथालय और उसकी संपत्ति की स्वामित्व नहीं है तो वह कैसे कोई निर्णय ले सकती है।

अनाथालय का इतिहास जानने वाले लोगों के अनुसार आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती 1883-84 में बरेली आए थे। उन दिनों वह बच्चों की चोरी, बाल शोषण और उनकी अशिक्षा दूर करने के लिए अभियान चला रहे थे। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने यहां दान की जमीन पर अनाथालय की स्थापना कराई थी। करीब 140 वर्षों में हजारों अनाथ बच्चों को अनाथालय में रहकर आत्मनिर्भर होने के लिए सहारा मिला।

लेकिन 2022 के बाद यहां गठित हुई कमेटी ने अनाथालय का स्वरूप बदलकर गुरुकुल स्थापित करने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया। दिसंबर 2022 तक यहां 55-60 अनाथ और बाल विकास समिति में पंजीकृत लड़के और लड़कियां थे। जिन्हें भरण- पोषण के साथ शिक्षा भी प्रदान कराई जा रही थी। अब अनाथालय प्रबंधन के अनुसार यहां युवाओं को शिक्षित करने और धर्म शास्त्रों का ज्ञान देने के लिए गुरुकुल बनाया जाएगा।

8 साल की बच्ची से छेड़खानी के आरोप में जेल गये प्रधान

जुलाई 2023 में अनाथालय के प्रधान ओमकार आर्य पर आठ साल की एक बच्ची के साथ अश्लील हरकतें करने के आरोप में केस दर्ज हुआ था। इस मामले में तत्कालीन महिला सीओ ने सीसीटीवी फुटेज और बच्ची के बयानों के आधार पर आरोपों को पुष्ट माना था। इसके बाद पुलिस ने ओमकार आर्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कहा जा रहा था कि ओमकार आर्य के जेल जाने के बाद कमेटी दूसरे प्रधान का चयन करेगी, लेकिन लोगों को तब आश्चर्य हुआ जब ओमकार जेल से लौटकर आर्य समाज अनाथालय के प्रधान की कुर्सी पर काबिज हो गया। बता दें, कि अनाथालय का संरक्षण आर्य समाज बिहारीपुर की समिति करती है। समिति के सदस्य ही पदाधिकारियों का चयन करते हैं। कई बार अनाथालय की संपत्ति पर लोगों की निगाह होने का मामला भी चर्चा में रहा है।

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