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‘घर जैसा महसूस हुआ’ आईएसएस से लौटने के बाद शुभांशु शुक्ला ने परिवार के साथ साझा की भावुक करने वाली तस्वीरें

लखनऊ। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला तीन अन्य लोगों के साथ एक सफल अंतरिक्ष मिशन से लौटने के बाद अमेरिका के ह्यूस्टन में हैं और पृथ्वी पर जीवन से सामंजस्य बिठा रहे हैं। उनके पिता ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर 18 दिन बिताने के बाद मंगलवार को पृथ्वी पर लौटे हैं।

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वह आईआईएस पर जाने वाले पहले भारतीय और अंतरिक्ष में राकेश शर्मा के बाद जाने वाले दूसरे व्यक्ति हैं। शुक्ला अभी ह्यूस्टन में हैं और उनकी पत्नी कामना और उनका छह वर्ष का बेटा कियाश पहले से वहां हैं।

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पत्र सूचना कार्यालय ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के हवाले से बताया है कि शुक्ला और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री मेडिकल और रि-अडाप्टेशन प्रक्रियाएं पूरी करने के लिए 23 जुलाई तक अलग थलग रहेंगे। 24 जुलाई से वे इसरो के साथ बातचीत शुरू करेंगे।

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शुभांशु शुक्ला के पिता शंभू दयाल ने लखनऊ में बताया, “उन्होंने (शुभांशु) कहा है कि पृथ्वी पर जीवन के साथ सामंजस्य बनाने के लिए उन्हें बहुत देखभाल की जरूरत है और यह देखभाल की जा रही है। टेलीफोन से बातचीत में शुभांशु इस उपलब्धि पर खासा उत्साहित दिखे क्योंकि यह उपलब्धि देश के लिए काफी मायने रखती है।”

भारतीय वायुसेना के 39 वर्षीय अधिकारी इस समय अपने परिवार के साथ ह्यूस्टन में हैं। अमेरिका से फोन पर बातचीत में शुक्ला की पत्नी कामना शुक्ला ने कहा, “हम ह्यूस्टन में हैं और हम उनसे पहले ही मिल चुके हैं। वह हमारे साथ हैं.. घर वापसी हो चुकी है और अब उनका पुनर्वास हो रहा है।”

शुक्ला के पिता ने कहा कि शुभांशु की इस उपलब्धि को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया से लखनऊ में पूरा परिवार अभिभूत है। उन्होंने कहा, “बेशक वह लखनऊ आएंगे भले ही थोड़ा वक्त लगेगा। लेकिन जब कभी वह आते हैं, बड़ा जश्न मनाया जाएगा। सच्चाई यह है कि इन दिनों हर क्षण हमारे लिए उत्सव जैसा है.. पूरा क्षेत्र हमारे साथ आनंद ले रहा है। बेटे के आने से हमारी खुशी और बढ़ेगी ही।”

20 दिन के अंतरिक्ष मिशन से धरती पर लौटे शुभांशु शुक्ला

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बृहस्पतिवार को कहा कि 20 दिन के अंतरिक्ष मिशन से धरती पर लौटे शुभांशु शुक्ला के प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण से संकेत मिले हैं कि उनकी हालत स्थिर है और तत्काल चिंता की कोई बात नहीं है। शुक्ला 15 जून को पृथ्वी पर लौटे। ड्रैगन ग्रेस अंतरिक्ष यान उन्हें और एक्सिओम-4 मिशन के तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर कैलिफोर्निया के सैन डिएगो तट पर उतरा। अंतरिक्ष यान से बाहर निकलते ही ‘रिकवरी शिप’ पर अंतरिक्ष यात्रियों की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच की गई।

 पुनर्वास कार्यक्रम के लिए ह्यूस्टन में शुभांशु

बाद में, अंतरिक्ष यात्रियों को आगे की चिकित्सा जांच और परामर्श सत्रों के लिए हेलीकॉप्टर द्वारा रिकवरी शिप से मुख्य भूमि पर ले जाया गया। बाद में, शुक्ला को सूक्ष्म गुरुत्व के किसी भी प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए एक सप्ताह के पुनर्वास कार्यक्रम के लिए ह्यूस्टन ले जाया गया। इसरो ने कहा,‘‘इस कार्यक्रम का संचालन एक्सिओम के फ्लाइट सर्जन द्वारा किया जा रहा है और इसरो के फ्लाइट सर्जन भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं।’’

हृदय संबंधी आकलन, मांसपेशियों-अस्थियों का परीक्षण और मनोवैज्ञानिक जांच शामिल

पुनर्वास कार्यक्रम में कई प्रकार की चिकित्सीय जांच, विशेष रूप से हृदय संबंधी आकलन, मांसपेशियों और अस्थियों का परीक्षण और मनोवैज्ञानिक जांच शामिल है। पुनर्वास गतिविधियों में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी, सूक्ष्म गुरुत्व के किसी भी प्रभाव के समाधान करने और व्यक्ति को सामान्य गतिविधियों में वापस लौटने के लिए तैयार करने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाता है।

शुक्ला ने 20 दिवसीय मिशन के दौरान 18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताए। वहां उन्होंने इसरो और नासा द्वारा डिजाइन किए गए सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण प्रयोग किये। अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष में अपने प्रवास के दौरान पृथ्वी की 320 बार परिक्रमा की और 135.18 लाख किलोमीटर से अधिक की यात्रा की।

एक इंस्टाग्राम पोस्ट पर बुधवार शाम शुक्ला ने अपनी पत्नी और बेटे से मुलाकात की फोटो साझा की और लिखा, “यह चुनौतीपूर्ण था। पृथ्वी पर वापस आकर परिवार को बाहों में भरना… घर जैसा महसूस हुआ।

अंतरिक्ष के लिए उड़ान अद्भुत है, लेकिन लंबे समय बाद अपने प्रियजनों को देखना भी उतना ही अद्भुत है।” शुक्ला 2027 में भारत के प्रथम मानव अंतरिक्ष उड़ान गगनयान को लांच करने की इसरो की योजना का भी हिस्सा हैं।

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