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Skill job में यूपी के युवा चौथे पायदान पर…केंद्र सरकार की Skill India Report में खुलासा, इनोवेशन, स्टार्टअप और काउंसलिंग पर जोर

लखनऊ: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देश पर नए सत्र में उच्च शिक्षा संस्थानों को कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देना होगा। परंपरागत पाठ्यक्रमों को भी कौशल और वर्तमान जरूरतों के अनुसार संशोधित करने की प्रक्रिया करनी होगी। नई शिक्षा नीति के अनुसार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने उच्च शिक्षा संस्थानों को निर्देश जारी करना आरंभ किया है। इसके अलावा अब शिक्षण संस्थानों में नवाचार, स्टार्टअप, कॅरियर मेला, काउंसलिंग आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देना अनिवार्य होगा। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के स्किल इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के युवा कौशल आधारित रोजगार में देश में चौथे नंबर पर हैं।

उच्च शिक्षा के बाद छात्र-छात्राओं को अधिक से अधिक रोजगार से जोड़ा जा सके इसके लिए कौशल आधारित शिक्षा पर जोर है। लखनऊ के विश्वविद्यालयों को देखें तो ज्यादातर विश्वविद्यालयों ने कौशल विकास संबंधित पाठ्यक्रमों को पहले ही लागू कर दिया है। युवाओं में अधिक से अधिक नवाचार और स्टार्टअप शुरू हो सके इसके लिए इंक्यूबेशन सेंटर बनाने की शुरुआत भी हो चुकी है। जिन विश्वविद्यालयों ने इंक्यूबेशन सेंटर नहीं बनाया है वहां भी इसके निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। जहां पर छात्रों के नवाचार और स्टार्ट अप को समर्थन और सहयोग दिया जाएगा।

लखनऊ के विश्वविद्यालयों की पहल

लखनऊ विश्वविद्यालय में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को छोड़ दें तो परंपरागत पाठ्यक्रमों में भी छात्रों का प्लेसमेंट होना शुरू हो गया है। यहां पर योग, नेचुरोपैथी से लेकर ज्योतिष, प्रबंधन, विभिन्न भाषाओं के पाठ्यक्रम, तकनीक और कौशल से संबंधित अनेक पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। एकेटीयू ने तो सेंटर फॉर एक्सीलेंस और इंक्यूबेशन सेंटर पहले से काम कर रहा है। जो स्टार्टअप में छात्रों की मदद कर रहे हैं। ख्वाजा मोइनुददीन भाषा विश्वविद्यालय ने कौशल संबंधित कई पाठ्यक्रम शुरू करने कर रहा है। बीबीएयू, डॉ. शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विवि छात्रों को रोजगार से जोड़ने के लिए कॅरियर काउंसिलिंग से लेकर स्किल डेवलपमेंट के कई कार्यक्रम चला रहे हैं।

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