पंजाबराज्य

पंजाब: रविवार को पराली जलाने के 122 मामले दर्ज, इस सीजन का सबसे बड़ा आंकड़ा

पंजाब में 15 सितंबर से 26 अक्टूबर तक पराली जलाने की 743 घटनाएं सामने आई हैं। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। आंकड़ों के अनुसार रविवार को 122 मामले सामने आए हैं, जो इस सीजन में एक दिन में सबसे अधिक हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार तरनतारन और अमृतसर जिलों में पराली जलाने के सबसे अधिक मामले सामने आए। पीपीसीबी के अनुसार कई किसान राज्य सरकार की पराली जलाने से रोकने की अपील की लगातार अवहेलना कर रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पिछले सप्ताह पराली जलाने के मामलों में तेज वृद्धि हुई है और 20 अक्टूबर तक ऐसे मामलों की संख्या 353 से बढ़कर 390 हो गई। आंकड़ों के अनुसार, पराली जलाने की सबसे अधिक 224 घटनाएं तरनतारन में सामने आईं, इसके बाद अमृतसर में 154, फिरोजपुर में 80, संगरूर में 47, पटियाला में 39, गुरदासपुर में 38 और कपूरथला में 29 घटनाएं दर्ज की गईं।

दिल्ली एनसीआर की हवा खराब

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने के लिए अक्सर पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराया जाता है। चूंकि अक्टूबर-नवंबर में धान की कटाई के बाद रबी की फसल, गेहूं, की बुवाई का समय बहुत कम होता है, इसलिए कुछ किसान फसल अवशेषों को जल्दी से हटाने के लिए अपने खेतों में आग लगा देते हैं। पीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, इस साल पंजाब में धान की खेती का कुल रकबा 31.72 लाख हेक्टेयर है। 26 अक्टूबर तक, इस रकबे के 56.50 प्रतिशत हिस्से की कटाई हो चुकी थी। पीपीसीबी के अनुसार, अब तक 329 मामलों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में 16.80 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 12 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं। आंकड़ों से यह भी पता चला है कि इस अवधि के दौरान भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) के तहत खेत में आग लगाने की घटनाओं के खिलाफ 266 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

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