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बहराइचः नौका दुर्घटना से प्रभावित 136 परिवारों को बसाने की प्रक्रिया शुरू, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मिलेंगे पक्के मकान

  • नदी–वन्य क्षेत्र से घिरे भरथापुर गांव का होगा विस्थापन

बहराइचः नेपाल की सीमा से लगते बहराइच जिले के भरथापुर गांव में पिछले साल एक नौका दुर्घटना से प्रभावित 136 परिवारों को उत्तर प्रदेश सरकार की पहल के बाद बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने यह जानकारी दी। तीन तरफ नदी व एक तरफ जंगल से घिरे टापू सरीखे नेपाल सीमा से सटे भरथापुर गांव के 136 प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश बाद राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सेमरहना गांव में सर्व सुविधायुक्त कॉलोनी बनाकर बसाने के क्रम में आवंटन प्रक्रिया की बृहस्पतिवार को औपचारिक शुरूआत कर दी गई।

जिलाधिकारी (डीएम) अक्षय त्रिपाठी ने संवाददाताओं से कहा, ”ग्राम भरथापुर के 136 परिवारों के विस्थापन व पुनर्वास के संबंध में मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद बृहस्पतिवार को अधिसूचना जारी कर दी गई। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सेमरहना गांव में कॉलोनी बनाकर आवास बनाने, कृषि भूमि चिह्नित करने व आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।”

पिछले साल 29 अक्टूबर को साप्ताहिक बाजार से लौट रहे ग्रामीणों को ले जा रही एक नौका कौडियाला नदी में पलट गई थी। इस घटना में 13 लोगों को बचा लिया गया, लेकिन महिलाओं और बच्चों सहित नौ लोग डूब गए। शव कई दिनों की मशक्कत के बाद बरामद किए गए, जबकि दो बच्चे अब भी लापता हैं। नौका हादसे के बाद दो नवंबर को मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वेक्षण किया था तथा गांव पहुंचकर परिवारों के प्रति अपनी व सरकार की ओर से संवेदना जताई थी। आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि सौंपी थी और उन्हें पूर्ण सरकारी सहायता का आश्वासन दिया।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि घने जंगलों के बीच रहने के लिए मजबूर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए और सुझाव दिया कि नयी बस्ती का नाम भरथापुर के नाम पर रखा जाए। त्रिपाठी ने कहा कि सरकार की आवास योजना के तहत प्रत्येक परिवार को एक स्थायी घर आवंटित किया जाएगा ताकि एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कॉलोनी में उचित जल निकासी व्यवस्था, पक्की सड़कें, हरित क्षेत्र, एलईडी स्ट्रीटलाइट, पेयजल सुविधाएं और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचा होगा।

उन्होंने बताया कि निवासियों और पशुधन के लिए स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं भी पास में ही उपलब्ध होंगी। डीएम ने कहा, ”हमने मुख्यमंत्री से भूमिपूजन के लिए आगमन का अनुरोध किया है, लेकिन अब तक उनके आगमन के संबंध में कोई निर्देश अथवा कार्यक्रम नहीं आया है। विस्थापन व पुनर्वास के लिए ग्रामीणों को किए जाने वाले आवंटन के संबंध में शासन से मिले निर्देशों के तहत कार्रवाई आरंभ कर दी गई है।”

मंत्रिमंडल की मंजूरी और भूमि की पहचान एवं आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने से प्रभावित ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई है। विस्थापितों की सूची में शामिल ग्रामीण संतोष कुमार, कंधई लाल, लालता प्रसाद व रोहित कुमार ने फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि हम सब योगी जी के शुक्रगुजार हैं कि वह पीढ़ी दर पीढ़ी कठिन जीवन जीने के लिए मजबूर हम सभी को व हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए अन्य लोगों की तरह सामान्य जीवन व्यतीत करने की व्यवस्था करके दे रहे हैं। अधिकारियों ने बताया, कुछ बुजुर्ग ग्रामीण अपनी पैतृक भूमि से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं और वे अब भी विस्थापन नहीं चाहते हैं, हालांकि अन्य लोग उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे हैं।

बहराइच जिले की मिहींपुरवा तहसील में स्थित भरथापुर गांव भौगोलिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यह दो तरफ से गेरुआ और कौडियाला नदियों से, उत्तर में घने जंगलों और नेपाल की सीमा से घिरा हुआ है। सड़क संपर्क नहीं होने के कारण यहां के निवासी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पूरी तरह से नौका पर निर्भर हैं और जंगली जानवरों के खतरे के बीच जंगल के रास्तों से होकर पगडंडियों पर चलकर पैदल यात्रा करते हैं।

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