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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी को लिखा पत्र, उठाई यह मांग

वाराणसी। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोवंश को लेकर शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि हाल ही में राज्य के पशुपालन मंत्री ने उनके द्वारा उठाए गए गोकशी के गंभीर मुद्दे को ‘भ्रम’ और ‘असत्य’ करार दिया। मंत्री ने दावा किया था कि राज्य में गो-वंश पूर्णतः सुरक्षित है।

 शंकराचार्य ने पत्र में कहा कि धर्मसत्ता और राजसत्ता के बीच सत्य की स्थापना के लिए आवश्यक है कि दावों का धरातलीय एवं वैज्ञानिक परीक्षण हो। यदि शासन का विश्वास अडिग है कि राज्य में गोहत्या पूर्णतः बंद हो चुकी है, तो पारदर्शिता के लिए ज्योतिषपीठ के प्रतिनिधियों को कुछ बिंदुओं पर अनुमति एवं पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाए।

उन्होने मांग की कि निर्यातित मांस का डीएनए परीक्षण कराया जाए। हापुड़, अलीगढ़, मेरठ और उन्नाव जैसे निर्यात केंद्रों से रैंडम सैंपलिंग कर स्वतंत्र जांच की अनुमति दी जाए। चर्म शोधन इकाइयों का निरीक्षण किया जाए। कानपुर एवं अन्य क्षेत्रों में आने वाली खालों के वैज्ञानिक परीक्षण हेतु प्रवेश की अनुमति प्रदान की जाए। परिवहन एवं सीमा निरीक्षण किया जाए।

अंतर्राज्यीय सीमाओं और प्रमुख मार्गों पर संदिग्ध वाहनों के आकस्मिक निरीक्षण में प्रशासनिक सहयोग दिया जाए। वधशालाओं का अघोषित निरीक्षण: नगर निकायों एवं निजी वधशालाओं की व्यवस्था की धरातलीय जांच के लिए ‘सरप्राइज ऑडिट’ का अधिकार प्रदान किया जाए। इसके अलावा गौशाला एवं निस्तारण केंद्रों का ऑडिट: सरकारी गौशालाओं में मृत्यु के कारणों एवं शवों के निस्तारण की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए और अधिकृत प्रयोगशालाओं की सूची जारी की जाए।

शंकराचार्य ने कहा कि इन बिंदुओं के तहत संकलित नमूनों की निष्पक्ष जांच के लिये शासन द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की सूची उपलब्ध कराई जाए, जिनकी रिपोर्ट को शासन साक्ष्य के रूप में स्वीकार करता हो। इससे भविष्य में जांच परिणामों पर कोई विवाद नहीं रहेगा।

उन्होने आगे लिखा, “सत्य को किसी आवरण की आवश्यकता नहीं होती। यदि शासन के दावे सत्य हैं, तो इस अनुमति और सूची प्रदान करने में एक क्षण का भी विलंब नहीं होना चाहिए। यदि हमें यह अनुमति नहीं दी जाती, तो जनता के समक्ष यह स्वतः सिद्ध हो जाएगा कि पशुपालन मंत्री का वक्तव्य केवल सत्य पर पर्दा डालने का प्रयास था।”

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