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शिखर धवन को बड़ी कानूनी जीत: दिल्ली कोर्ट ने एक्स-वाइफ को 5.72 करोड़ लौटाने का दिया आदेश, ऑस्ट्रेलियाई ‘प्रॉपर्टी सेटलमेंट’ को भारतीय कानूनों के खिलाफ

पूर्व भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन को दिल्ली के पटियाला हाउस फैमिली कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। जज देवेंद्र कुमार गर्ग ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए धवन की पूर्व पत्नी आयशा मुखर्जी को लगभग 5.72 करोड़ रुपये (ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में AU$812,397.50 + AU$82,000) वापस करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया के फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए ‘प्रॉपर्टी सेटलमेंट’ के आदेश भारत में लागू नहीं होंगे, क्योंकि यह भारतीय कानूनों के हिसाब से खासकर हिंदू मैरिज एक्ट के विपरीत है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?  

धवन और आयशा (ऑस्ट्रेलियाई नागरिक) की शादी 2012 में हुई थी, लेकिन 2021 में अलगाव के बाद 2023 में दिल्ली कोर्ट ने ‘क्रूरता’ के आधार पर तलाक दे दिया। तलाक के बाद ऑस्ट्रेलियाई फैमिली कोर्ट ने ‘प्रॉपर्टी सेटलमेंट’ के तहत धवन को ऑस्ट्रेलिया में दो प्रॉपर्टी (बेरविक और क्लाइड नॉर्थ) की बिक्री से मिली रकम का बड़ा हिस्सा आयशा को देने का आदेश दिया था। भारतीय कानून में ऐसी संपत्ति का ‘मैरिटल पूल’ बनाकर 60% तक पत्नी को देने का कोई प्रावधान नहीं है।

धवन का दावा और कोर्ट की टिप्पणी  

धवन ने दिल्ली कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि ऑस्ट्रेलियाई कोर्ट में वे अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि पूर्व पत्नी की धमकियों के कारण पेश हुए थे। आयशा ने धमकी दी थी कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो करियर-बर्बाद करने वाला मटेरियल फैलाया जाएगा। कोर्ट ने माना कि यह सहमति जबरदस्ती, धोखे और धमकी से ली गई थी, इसलिए वह फाइनेंशियल एग्रीमेंट रद्द है।

जज गर्ग ने कहा:  

“ऑस्ट्रेलियाई फैमिली लॉ एक्ट, 1975 के तहत ‘प्रॉपर्टी सेटलमेंट’ का कॉन्सेप्ट भारतीय पब्लिक पॉलिसी, हिंदू मैरिज एक्ट, ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट और अन्य कानूनों के खिलाफ है। विदेशी आदेश भारत में स्वतः लागू नहीं होते, खासकर जब वे भारतीय मैट्रिमोनियल लॉ से मेल नहीं खाते।”

कोर्ट के मुख्य आदेश  

– आयशा को प्रॉपर्टी बिक्री से मिली कुल रकम (AU$812,397.50 + AU$82,000) धवन को लौटानी होगी।  
– इस राशि पर मुकदमा दायर करने की तारीख से अंतिम भुगतान तक 9% सालाना ब्याज भी देना होगा।  
– आयशा की ओर से ऑस्ट्रेलियाई आदेश के आधार पर Rs 16.9 करोड़ की मांग को खारिज किया गया।  
– मामला एकतरफा चला क्योंकि आयशा ने दिल्ली कोर्ट में जवाब दाखिल नहीं किया।

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