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नारकोटिक्स एनोनिमस की बैठकें भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम का प्रमुख स्तंभ बनीं

चंडीगढ़, 23 जून:

पंजाब सरकार के नशा विरोधी अभियान के उपचार के बाद पुनर्वास पक्ष को और अधिक मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा शुरू किए गए ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम के तहत पंजाब के 13 जिलों में नारकोटिक्स एनोनिमस (एनए) की बैठकें आयोजित की जा रही हैं।

लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (एलएमएचपी) फेलोज़ के सहयोग से, नारकोटिक्स एनोनिमस अपने हॉस्पिटल एंड इंस्टीट्यूशंस (एच एंड आई) कार्यक्रम के माध्यम से सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में नियमित जागरूकता और रिकवरी सत्र आयोजित कर रहा है। यह पहल वर्तमान में मुक्तसर, लुधियाना, रूपनगर, मानसा और अन्य नौ जिलों में चल रही है।

इस कार्यक्रम के तहत, नारकोटिक्स एनोनिमस की बैठकें रिकवरी कर रहे व्यक्तियों को ऐसा वातावरण प्रदान करती हैं, जहां वे बिना किसी आलोचना के डर के अपने अनुभव, संघर्ष और उपलब्धियां साझा कर सकते हैं। इससे यह विश्वास और मजबूत होता है कि एक रिकवरी कर चुका नशा छोड़ने वाला व्यक्ति ही दूसरे की सबसे बेहतर सहायता कर सकता है।

नारकोटिक्स एनोनिमस रिकवरी कर रहे नशा छोड़ चुके लोगों का एक वैश्विक फेलोशिप संगठन है, जो 12-स्टेप कार्यक्रम और पीयर-लीड बैठकों के माध्यम से सहायता प्रदान करता है ताकि लोग नशा-मुक्त रह सकें। वर्ष 1953 में स्थापित यह संस्था अब अनेक देशों में कार्यरत है और इसका मूल सिद्धांत यह है कि रिकवरी आपसी सहयोग और अनुभवों की साझेदारी के माध्यम से सबसे अधिक प्रभावी होती है।

श्री मुक्तसर साहिब के एक रिकवरी कर चुके व्यक्ति, जो सरकारी डी-एडिक्शन सेंटर में एनए बैठकों में नियमित रूप से भाग लेते हैं, ने बताया कि ये सत्र उन्हें नशा-मुक्त रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। नाम गोपनीय रखने की शर्त पर उन्होंने कहा, “आप एक सप्ताह या एक महीने तक नशा-मुक्त रह सकते हैं, लेकिन अपने जीवन को स्थायी रूप से नशा-मुक्त बनाने में एनए मदद करता है क्योंकि पीयर ग्रुप के अनुभव आपकी अपनी कहानी से मेल खाते हैं। यदि वे नशा छोड़ सकते हैं तो आप क्यों नहीं? नशा छोड़ने के बाद मैं अपने एक मित्र को भी यहां लेकर आया, जिससे मेरी पहचान नशा मुक्ति केंद्र में हुई थी। उसे भी यह सहायता बहुत लाभदायक लगी है।”

लुधियाना ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर में उपचाराधीन एक मरीज जगपाल सिंह (परिवर्तित नाम) ने कहा, “नशा छोड़ चुके अन्य साथियों के अनुभव सुनने का मुझ पर गहरा प्रभाव पड़ा। इससे मेरे भीतर एक सकारात्मक प्रतिक्रिया विकसित हुई। जब मैंने अपनी कहानी सुनाई तो मुझे सुझाव मिले और मैं प्रेरित महसूस करने लगा। मैं सिफारिश करता हूं कि उपचार के साथ-साथ एनए की बैठकें नशे के शिकार व्यक्तियों की रिकवरी में बहुत मददगार हो सकती हैं।”

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार का पीयर सपोर्ट नशा मुक्ति के दौरान आने वाली सबसे बड़ी समस्या ‘अकेलेपन’ से निपटने में काफी सहायक साबित होता है। कार्यक्रम से जुड़े एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, “कई मरीज डी-एडिक्शन सेंटर छोड़ने के बाद अकेलापन महसूस करने के कारण दोबारा नशे की ओर लौट जाते हैं। एनए उन्हें एक सपोर्ट नेटवर्क प्रदान करता है और भरोसा दिलाता है कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं।”

बैठकों में भाग लेने वालों की संख्या हाल के समय में लगातार बढ़ रही है और 13 जिलों में सरकारी सुविधाओं में नियमित सत्र चलाए जा रहे हैं, जो इस अभियान के दीर्घकालिक पुनर्वास पर जोर को दर्शाता है। मानसा में एनए से जुड़े एक एच एंड आई (हॉस्पिटल्स एंड इंस्टीट्यूशंस) समन्वयक ने बताया कि संस्था जिला प्रशासन के सहयोग से बैठकों का आयोजन करती है।

मुक्तसर में एनए से जुड़े एक एच एंड आई (हॉस्पिटल्स एंड इंस्टीट्यूशंस) समन्वयक ने कहा कि संस्था जिला प्रशासन के सहयोग से बैठकों का आयोजन करती है।

उन्होंने कहा, “जब मैं स्वयं पहली बार एनए की बैठक में शामिल हुआ तो मुझे महसूस हुआ कि इस बीमारी से अकेले लड़ना कठिन है और यह समूह मेरा सपोर्ट सिस्टम बन गया।
 इसने मुझे विश्वास दिलाया कि एक व्यक्ति नशा छोड़ सकता है। सदस्यता के लिए केवल एक ही योग्यता है—नशा छोड़ने की इच्छा। सदस्य गुमनाम रहते हैं, जिससे वे अपने संघर्ष और रिकवरी की यात्रा के बारे में खुलकर बात कर सकते हैं।”

मुक्तसर ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर में मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता परमिंदर सिंह ने कहा, “नारकोटिक्स एनोनिमस एक ड्रग एडिक्ट के लिए सबसे अच्छा मंच है क्योंकि पीयर ग्रुप के सदस्य उसकी स्थिति और अनुभव को पूरी तरह समझते हैं और उसे नशा-मुक्त जीवन की ओर ले जाने में सबसे अधिक मददगार होते हैं, क्योंकि वे स्वयं उन कठिनाइयों से गुजर चुके होते हैं। वास्तव में, काउंसलिंग सत्रों में भी जो बातें मरीज खुलकर नहीं कर पाता, वह एनए सदस्यों के साथ आसानी से साझा कर लेता है।”

लुधियाना डी-एडिक्शन सेंटर में काउंसलर अमनप्रीत कौर ने कहा, “पीयर ग्रुप अपने जीवन में नशा छोड़ने के बाद आए सकारात्मक बदलावों को साझा करते हैं और यह दूसरों को भी उसी राह पर चलने के लिए प्रेरित करता है। शुरुआत में बैठकों में भाग लेना अनिवार्य होता है। यदि कोई इन बैठकों में नियमित रहता है तो वह नशा मुक्ति के काफी करीब होता है। बैठकों से अनुपस्थित रहना अक्सर दोबारा नशे की ओर लौटने की चेतावनी हो सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “एनए ग्रुप थेरेपी मरीजों को बहुत आत्मविश्वास देती है। जब वे एक गैर-आलोचनात्मक माहौल में अपने अनुभव साझा करना शुरू करते हैं तो वे स्वयं को बेहतर तरीके से समझा हुआ महसूस करते हैं। इससे उन्हें निरंतर उपचार की ओर बढ़ने में मदद मिलती है और वे पूरी तरह नशा-मुक्त जीवन की ओर अग्रसर हो सकते हैं।”

अधिकारियों ने बताया कि कई पूर्व नशा करने वाले, जो लंबे समय से नशे से दूर हैं, अब स्वयंसेवक और मेंटर के रूप में कार्य कर रहे हैं तथा जिला प्रशासन को बैठकों के लिए प्रतिभागियों को जोड़ने में सहायता कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में एनए नेटवर्क का विस्तार करना नशा विरोधी अभियान के तहत हासिल उपलब्धियों को स्थायी बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

पंजाब नशे की लत के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज कर रहा है। ऐसे में नारकोटिक्स एनोनिमस समूहों का बढ़ता नेटवर्क राज्य के प्रयासों को मजबूती प्रदान कर रहा है ताकि नशा मुक्ति केवल उपचार तक सीमित न रहे, बल्कि यह दीर्घकालिक सामाजिक पुनर्वास और नशा-मुक्त जीवन में परिवर्तन का माध्यम बन सके।

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