मेरठ में दलित छात्रा की मौत पर बवाल, पुलिस ने उपद्रवियों पर किया लाठीचार्ज
उत्तर प्रदेश के मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर भारी बवाल हुआ है। छात्रा को इंसाफ दिलाने के लिए हो रही महापंचायत में बाहर के उपद्रवी पहुंच गए। इन उपद्रवियों ने प्रदर्शनकारियों को उकसाने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने उपद्रवियों पर डंडे बरसाकर उनकी साजिश को नाकाम कर दिया। इस दौरान SSP अविनाश पांडेय खुद एक शख्स पर थप्पड़ बरसाते हुए नजर आए। पुलिस के मुताबिक मेरठ कलेक्ट्रे़ट के बाहर हुए प्रोटेस्ट को कुछ ऐसे उपद्रवियों ने उकसाया जो दूसरे जिले से मेरठ आए थे और उन पर पहले से ही कई केस दर्ज हैं। पुलिस ने इस मामले में 13 उपद्रवियों पर FIR दर्ज किया है जिनमें से 6 को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी उपद्रवियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें छापेमारी कर रही हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, ललिता गौतम की हत्या के आरोपियों को सजा दिलाने की मांग को लेकर कल महापंचायत का आयोजन हुआ था लेकिन भीड़ ने कलेक्ट्रेट के गेट को बंद कर दिया। वे गेट पर धरने पर बैठ गए और हंगामा करने लगे। प्रदर्शनकारी मेरठ के डीएम को बुलाने पर अड़े थे जिसके बाद एक्शन में आए मेरठ के एसएसपी ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने माइक के जरिए प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटने की अपील की। उसके बाद भी भीड़ नहीं हटी तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय ने खुद उपद्रवियों को थप्पड़ मारे।
मेरठ SSP ने बरसाए थप्पड़
मेरठ में ललिता गौतम मर्डर केस को लेकर महापंचायत के ऐलान के बाद पुलिस अलर्ट मोड में थी, पुलिस के सीनियर अधिकारी मौजूद थे। मेरठ के SSP ने पहले तो प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, खुद माइक संभाला और कहा कि ये रोड किसी के पिता जी की नहीं है। इसके बावजूद जब प्रदर्शनकारी नहीं माने तो SSP अविनाश पांडेय ने खुद पुलिस वैन के अंदर जाकर गिरफ्तार प्रदर्शनकारी और खुद को वकील कहने वाले शख्स रवि गौतम पर थप्पड़ बरसा दिए।
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी
इस प्रदर्शन में ललिता गौतम के परिजन भी शामिल थे। प्रदर्शनकारी सबसे पहले कमिश्नरी चौराहे के पास पहुंचे और फिर नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट के गेट पर धरना देकर बैठ गए। इसके बाद पुलिस के सीनियर अधिकारियों ने मोर्चा संभाल लिया और कहा कि यहां पर प्रदर्शन करना गैर कानूनी है। मेरठ में हुए इस बवाल के बाद पुलिस ने 13 उपद्रवियों पर FIR दर्ज की है। इनमें से 6 को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में बाहर से गए प्रदर्शनकारी रवि गौतम, दिग्विजय सिंह और रितिक भी शामिल है। पुलिस बाकी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम बनाकर छापेमारी कर रही है।
पुलिस ने बताया पूरा मामला
इस घटना के बारे में मेरठ पुलिस ने कहा- “दिनांक 15 मई को थाना टीपीनगर क्षेत्र से एक महिला गुमशुदा हुई थी, जिसके संबंध में उसके परिजनों द्वारा दिनांक 16 मई को थाना टीपीनगर पर सूचना दी गई थी। दिनांक 17 मई को उक्त महिला का शव थाना रोहटा क्षेत्र के एक गांव से बरामद हुआ था, जिसकी तत्काल शिनाख्त कराई गई। प्रकरण की विवेचना क्षेत्राधिकारी ब्रह्मपुरी द्वारा की जा रही है। विवेचना के दौरान पुलिस द्वारा दो अन्य व्यक्तियों के नाम प्रकाश में लाए गए, जिनके द्वारा साक्ष्य मिटाने में सहयोग किया गया था। उक्त व्यक्तियों के विरुद्ध भी सुसंगत धाराओं की बढ़ोतरी करते हुए आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की गई। प्रकरण के संबंध में मृतका के परिजनों की विवेचक, संबंधित थाना प्रभारियों, क्षेत्राधिकारी सिविल लाइन एवं अन्य अधिकारियों से लगातार वार्ता कराई जा रही थी तथा उनके द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं का संतोषजनक समाधान किया गया था। इसके बावजूद कुछ अराजक एवं अवैधानिक तत्वों द्वारा मृतका के परिजनों को भड़काकर प्रकरण को अनावश्यक रूप से अलग स्वरूप देने का कुत्सित प्रयास करते हुए ज्ञापन देने के नाम पर भीड़ एकत्र कर सड़क जाम कर दी गई। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बार-बार समझाने के बावजूद जाम नहीं खोला गया, जिसके कारण कानून एवं यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक न्यूनतम बल प्रयोग कर जाम खुलवाया गया।”
पुलिस ने आगे कहा- “प्रकरण में उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों एवं सोशल मीडिया के विश्लेषण के आधार पर सड़क जाम लगवाने, लोगों को उकसाने तथा पूरे घटनाक्रम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले व्यक्तियों को चिह्नित किया गया। इसी क्रम में अभियुक्त दिग्विजय सिंह पुत्र रघुराज सिंह भाटी निवासी हसनपुर, जनपद अमरोहा व अन्य चिह्नित व्यक्तियों की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है तथा साक्ष्यों के आधार पर उनके विरुद्ध भी आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। उपरोक्त प्रकरण में चिन्हित व्यक्तियों का आपराधिक इतिहास होना भी पाया गया है।”



