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आतंकियों को सजा सुनाए जाने पर कानपुर में बढ़ी सरगर्मी, जाजमऊ आतंकी ठिकानों के लिए होता मशहूर

कानपुर। पिछले कई सालों से जाजमऊ आतंकी ठिकानों के लिए मशहूर होता रहा है। खुरासान मॉड्यूल से जुड़े आरोपियों को लेकर जाजमऊ में दबी जुबान चर्चा का माहौल है। हालांकि इस मामले में हर कोई कतरा रहा है, और कोई कुछ भी खुलकर कहने से बच रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों और मीडिया की आहट से लोग चौकन्ना होकर घरों की खिड़कियों से झांकने लगते हैं। सोमवार या मंगलवार को आतंकियों को सजा सुनाई जाने के मामले में सभी लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं। हालांकि, इलाके के लोग उन परिवारों से सामाजिक दूरी होने की बाद कहते है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल परे है।

जाजमऊ के मनोहर नगर ऊंचा टीला स्थित एटीएस द्वारा मारे जा चुके आतंकी सैफुल्लाह का घर हो या बंगालीघाट स्थित मास्टरमाइंड आतंकी गौस मोहम्मद खान का। दोनों घरों के आसपास सन्नाटा पसरा रहता है। सैफुल्लाह के चचेरे भाई फैजल व दानिश से इलाके के लोग मतलब नहीं रखते हैं। इलाके के लोगों ने दबी जुबां बताया कि मतलब रखने वाले बेहद शांत और सुशील लोग थे। जबकि जांच एजेंसियों ने उन्हें  सबूत के साथ गिरफ्तार किया है।

इसमें मास्टरमाइंड गौस मोहम्मद को सुनाई गई है। लोगों का कहना है कि हाल फिलहाल एजेंसी कब किस समय जांच करने आई इसका उन्हें पता नहीं चला है। इलाके के कुछ लोगों का कहना है, कि सिर्फ अखबारों में पढ़कर जानकारी होती है।

गंगा कटरी थी फायर रेंज

मास्टरमाइंड आतंकी गौस मोहम्मद लोगों को धर्म की कसम और रुपये कमाने का लालच देकर युवाओं को अपने संगठन से जोड़ता था। उनका ब्रेनवाश करने के साथ ही उन्हें जेहाद के लिए तैयार करता था। कटरी में सप्ताह में तीन विशेष दिनों में संगठन से जुड़े लोगों को हथियार चलाने का प्रशिक्षण देता था। जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, गौस मोहम्मद जब जाजमऊ में रहने आया तो वह यहां स्थित एक धार्मिक स्थल पर प्रतिदिन जाता था। वहीं पर उसकी मुलाकात मनोहर नगर जाजमऊ टीला निवासी सैफुल्लाह से हुई थी।

चले जाओ… किसी से कोई बात नहीं करनी…

जाजमऊ की मनोहर नगर ऊंचा टीला निवासी आतंकी सैफुल्लाह के घर का गेट बंद था। दरवाजों और खिड़कियों पर पर्दे पड़े थे। जिससे कोई अंदर की गतिविधियों का अंदाजा भी न लगा सके। कुछ ही पलों में एक शख्स ऊपर छत से झांककर तुरंत पीछे हट गया। मानो घर के सामने के हर शख्स की निगरानी होती हो। फिर गेट खटखटाने पर अंदर से कौन है कि आवाज आई। इसके साथ फिर पर्दा पड़ी खिड़की से एक शख्स कुछ पर्दा हटाकर झांक कर देखता है। यह व्यक्ति सैफुल्लाह का सबसे बड़ा भाई खालिद बताया गया। उनसे कुछ बात करने का प्रयास करते ही जवाब आता है, कोई बात नहीं करनी। काफी तेजी में मुख्य लोहे के गेट की अंदर की कुंडी लग जाती है।

फिर मुहल्ले के बुजुर्ग सलाउद्दीन के आवाज देने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। फिर कुछ देर ठहरने के बाद वह बेहद डरे और दहशत भरी आवाज में कुछ भी कहने से मना करते हुए जाने को कहते हैं। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि वह कभी-कभी मस्जिद में जाते हैं। परिवार का मुहल्ले में किसी से कोई खास मतलब नहीं है। लोगों ने बताया कि उनके पिता सरताज भी किसी से मतलब नहीं रखते थे। उनका क़ई साल पहले इंतकाल हो चुका है। पांच वर्ष पहले एजेंसियों ने लखनऊ के ठाकुरगंज निवासी हाजी अली में सैफुल्लाह को ढेर कर दिया था। सलाउद्दीन तीन भाइयों में सबसे छोटा था, घर का सबसे बड़ा भाई मुजाहिद भी यहीं रहता है।

आतंकी अंकल के नाम से मशहूर है गौस मोहम्मद

जाजमऊ के बंगाली घाट किनारे एकांत में दो मंजिला बनें आतंकी अंकल के नाम से मशहूर एयरफोर्स कर्मी रहे गौस मोहम्मद का मकान है। बताया गया कि मकान में उनके बड़े भाई आकिब के परिवार के अलावा आतंकी की पत्नी के साथ एक बेटा व एक बेटी रहते हैं। बताया गया कि गौस का नाम आतिफ उर्फ जीएम भी है। उनके पिता परवेज प्रॉपर्टी का काम करते थे। वहीं, बगल में एक चमड़े का कारखाना भी है। लोगों ने बताया कि पत्नी मुकदमों की तारीख पर जाती हैं। पड़ोस के बुजुर्ग रियाज अहमद ने बताया कि पूरा परिवार बेहद शांत स्वभाव का है, कुछ समझ नहीं आता कि यह सब कैसे हो गया। कहा कि यह हम सब की समझ से परे है।

बताया वैसे परिवार लोगों के दुख सुख में शामिल होता है। बताया कि यहां किसी जांच एजेंसी के आने की पता नहीं चला। लखनऊ में मारे गए आतंकी सैफुल्ला के घर से महज तीन सौ मीटर की दूरी पर गौस का घर है। गौस मोहम्मद उर्फ जीएम आतंकी गुट का मास्टरमाइंड था। वह नौजवानों को बरगलाने का कार्य करता था। उसने आतिफ मुजफ्फर का इस कदर ब्रेनवॉश किया था कि उसने अपनी जमीन बेचकर गुट में 22 लाख लगाए था।

आंख दिखाने से जो डरता था वो कैसे यह सब कर सकता है

जाजमऊ के आशियाना कालोनी रोड स्थित ताड़बगिया में बाबा कुआं के सामने स्थित आतंकी सैफुल्लाह के चचेरे भाई फैजल और दानिश का घर है। जिसमें एक दुकान में फैजल परचून की दुकान चलाने के साथ पढ़ाई करता था। घर का गेट बंद था। घर के अंदर से निकली एक महिला ने बताया कि दानिश घर के आगे गाड़ी बनाने का काम करता था। बेटों को गलत फंसाए जाने की बात कहते हुए कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। परिजनों का कहना था कि आज भी यकीन नहीं होता कि जो बच्चा आंख दिखाने से डर जाता था, वह ऐसा कैसे कर सकता है। जब सुना था, तो आजतक यकीन ही नहीं हुआ।

वह दुकान में बैठकर पढ़ाई करता रहता था। पास में बैठे दो बुजुर्गों ने बताया कि यहां पर सैफुल्लाह का आना जाना रहता था। वह दुकान पर ही बैठकर उनसे बात करता था। इसके अलावा लोगों ने बताया कि इनके पिता अध्यापक रहे है। वह अक्सर कहते हैं कि आखिर यह कैसे हो सकता है कि एक अध्यापक अपने बेटे को गलत रास्ते से दूर रखने से ना रोक सके। इन दोनों से बड़ा भाई इमरान है। सिर्फ उसकी शादी हुई है। लोगों ने यहां हाल फिलहाल किसी जांच टीम के आने की पुष्टि नहीं की।

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