
डिब्रूगढ़। असम विधानसभा चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को डिब्रूगढ़ में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विपक्षी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ और लोगों के उत्साह को देखकर पीएम मोदी ने कहा कि डिब्रूगढ़ आने का उन्हें कई मौके मिले हैं, लेकिन इस बार जो जोश और उत्साह दिख रहा है, वह बेमिसाल है।
उन्होंने कहा कि जनता का यह भारी समर्थन कांग्रेस के लिए बड़ी चिंता का कारण है। कांग्रेस पहले से ही हतप्रभ है और मतदान से ठीक पहले ऐसी तस्वीरें उसे और अधिक निराश कर देंगी। जनता का यह जोश एक सशक्त संदेश दे रहा है। प्रधानमंत्री ने असम की सांस्कृतिक विविधता और एकता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की शानदार परंपरा रही है। अहोम, कोच-राजबंशी, मोरान, मोतोक, मिसिंग, देवरी जैसे विभिन्न समुदाय सदियों से आपसी सौहार्द के साथ रहते आए हैं। चाहे कोई असमिया बोले, कोई बांग्ला या कोई हिंदी, लेकिन सबका एक ही सपना है-विकसित असम और विकसित भारत।
पीएम मोदी ने असम के महान नेताओं और विभूतियों को याद किया। उन्होंने भूपेन हजारिका, गोपीनाथ बोरदोलोई और ज्योति प्रसाद अग्रवाल का जिक्र करते हुए कहा कि इन महान व्यक्तियों ने असम को नई दिशा दी है। उन्हीं की प्रेरणा से भाजपा-एनडीए सरकार डिब्रूगढ़ को एक प्रमुख व्यापारिक और आर्थिक केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि नुमालीगढ़ से डिब्रूगढ़ तक का हाईवे कांग्रेस की असम के प्रति उपेक्षा का साफ उदाहरण है। यह परियोजना 2005 में मंजूर हुई थी, लेकिन 2013 तक इसमें कोई खास प्रगति नहीं हुई, जबकि उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने असम के साथ सौतेला व्यवहार किया, जिससे अपर असम और बराक घाटी जैसे इलाकों का विकास रुक गया। कांग्रेस के लंबे शासनकाल में कनेक्टिविटी की कोई चिंता नहीं की गई। वहीं, अब भाजपा-एनडीए सरकार बोगिबील ब्रिज, भूपेन हजारिका सेतु, जोरहाट-माजुली सेतु और ब्रह्मपुत्र समेत अन्य नदियों पर बन रहे पुलों से क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।
पीएम मोदी ने कहा कि कुछ दिन पहले मोरान में भाजपा-एनडीए सरकार द्वारा बनाए गए नए हाईवे पर लड़ाकू विमानों की लैंडिंग का शानदार नजारा दुनिया ने देखा। मैं खुद वायुसेना के साथ उस सड़क पर उतरा। महज दस साल पहले असम के लोग सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी गुहार लगाते थे।



