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I-PAC के डायरेक्टर विनेश चंदेल को मिली जमानत, ED ने कहा- जांच में पूरा सहयोग किया

I-PAC के डायरेक्टर विनेश चंदेल को पटियाला हाउस कोर्ट ने मनी लांड्रिंग के मामले में जमानत दे दी है। खास बात यह रही कि ईडी ने इस जमानत याचिका का विरोध नहीं किया। इस वजह से उन्हें आसानी से जमानत मिल गई। IPAC के निदेशक और सह-संस्थापक विनेश चंदेल को कोर्ट ने कई शर्तों के साथ जमानत दी है, जिनमें सबूतों या गवाहों के साथ छेड़छाड़ करना मना है और जांच में पूरा सहयोग करने की बात शामिल है।

इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के को-फाउंडर विनेश चंदेल को पश्चिम बंगाल में मतदान खत्म होने के अगले दिन ही जमानत मिली है। कोर्ट ने भी जमानत देते समय साफ कहा ईडी ने विनेश चंदेल की जमानत का विरोध नहीं किया है। जांच अधिकारी के बयान का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि विनेश चंदेल ने जांच में पूरा सहयोग किया। उन्होंने जांच एजेंसी के साथ स्वेच्छा से जानकारी साझा की। इसी वजह से ईडी ने जमानत का विरोध नहीं किया।

इन शर्तों के साथ मिली जमानत

कोर्ट ने जमानत देते समय कुछ शर्तें भी लगाई हैं। कोर्ट की तरफ से साफ किया गया है कि चंदेल सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे, किसी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे, जांच में पूरा सहयोग करते रहेंगे और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसी के सामने पेश होंगे।

14 अप्रैल को 10 दिन की हिरासत में भेजे गए थे विनेश

दिल्ली की एक अदालत ने 14 अप्रैल को विनेश चंदेल को 10 दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया था। कोर्ट ने कहा था कि विनेश करोड़ों रुपये की आपराधिक कमाई के सृजन, हेराफेरी और कब्जे से जुड़ी प्रक्रियाओं और गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थे। आधी रात चंदेल को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन के आवास पर पेश किया गया था, जिसके बाद कार्यवाही सुबह 3:30 बजे तक चली थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह आरोपी से पूछताछ करने के लिए उन्हें 10 दिनों के लिए उसकी हिरासत में भेजे। न्यायाधीश ने 24 पृष्ठों के आदेश में कहा था, ”यह मानने के कारण हैं कि गिरफ्तार व्यक्ति (चंदेल) कई करोड़ रुपये की आपराधिक कमाई के सृजन, हेराफेरी और कब्जे से जुड़ी प्रक्रियाओं और गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है।”

13 अप्रैल को गिरफ्तार हुए थे चंदेल

न्यायाधीश टंडन ने कहा था कि अदालत ने ‘मैसर्स इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड’ के कामकाज के तरीके, दो अप्रैल को उपरोक्त कंपनी और कंपनी से जुड़े व्यक्तियों के विभिन्न परिसरों में की गई तलाशी, पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत दर्ज किए गए बयान आदि बातों पर गौर किया है। न्यायाधीश ने कहा था कि एजेंसी द्वारा प्रदान किए गए गिरफ्तारी के आधारों से पता चलता है कि चंदेल कंपनी द्वारा जुटायी गयी धनराशि के अंतरण के लिए हवाला चैनलों का उपयोग करता था, इसके अलावा वह बैंकिंग प्रणाली के बाहर बेहिसाब नकदी या अनौपचारिक अंतरण भी होने दे रहा था। न्यायाधीश ने कहा कि संघीय एजेंसी के अनुसार, चंदेल ने आठ जनवरी को कोलकाता में आई-पैक परिसर में ईडी की तलाशी के तुरंत बाद प्रमुख कर्मचारियों के खातों से ईमेल और संवेदनशील डेटा को हटाने का निर्देश भी दिया था तथा उसने स्वीकार किया कि वित्तीय रिकॉर्ड को हटाने समेत संबंधित निर्देश अगले दिन जारी किए गए और लागू किए गए। अदालत ने चंदेल को 23 अप्रैल तक 10 दिनों की हिरासत में रखने की अनुमति देते हुए निर्देश दिया था कि उससे पूछताछ सीसीटीवी कैमरों वाले स्थान पर की जाए और फुटेज को सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने यह भी कहा कि इसके अलावा, चंदेल की हर 48 घंटे में चिकित्सकीय जांच की जानी चाहिए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले एक बड़ी कार्रवाई में, ईडी ने 13 अप्रैल को देर शाम चंदेल को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। चंदेल भोपाल स्थित एनएलआईयू से कानून स्नातक हैं और आई-पैक में 33 प्रतिशत शेयरधारक हैं।

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