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दमन से थमेगा इंकलाब? सलेमपुर में गजाला लारी नजरबंद, देवरिया में सपा के ‘बरहज कूच’ को पुलिस ने भारी घेराबंदी से रोका

किले में तब्दील लारी हाउस, आधी रात से ही पुलिस की भारी तैनाती, समर्थकों को रोकने के लिए सलेमपुर से बरहज तक नाकेबंदी।

गौरव कुशवाहा / देवरिया। जनपद में पुलिसिया कार्रवाई और कथित ‘फर्जी मुकदमों’ के खिलाफ बिगुल फूंकने की तैयारी कर रहे समाजवादी पार्टी के नेताओं पर प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कस दिया है। बरहज तहसील के घेराव और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को विफल करने के लिए पुलिस ने आधी रात से ही अपनी रणनीति पर अमल करते हुए जिले के दिग्गज सपा नेताओं को उनके आवासों पर ‘कैद’ कर लिया। सलेमपुर स्थित ‘लारी हाउस’ की भारी किलेबंदी करते हुए पुलिस ने सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और पूर्व विधायक फसीहा मंजर गजाला लारी को हाउस अरेस्ट कर लिया, जिसके बाद जनपद का राजनीतिक पारा गरमा गया है।

​सपा का यह आंदोलन बरहज विधानसभा के लक्ष्मीपुर गांव के प्रधान राजेश यादव और उनके परिजनों सहित दुबौली के प्रधान गामा यादव पर दर्ज हुए मामलों को ‘राजनीतिक विद्वेष’ से प्रेरित बताते हुए शुरू किया गया था। पार्टी का आरोप है कि जनपद में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) परिवारों का उत्पीड़न चरम पर है और निर्दोषों को झूठे मुकदमों में फंसाकर आवाज दबाई जा रही है। लारी हाउस के बाहर बीती रात से ही पुलिस की तैनाती ने आंदोलन की गंभीरता को स्पष्ट कर दिया।

​नजरबंदी के बीच पूर्व विधायक गजाला लारी ने सरकार के इस कदम को लोकतंत्र की हत्या करार दिया। उन्होंने फैज अहमद फैज की पंक्तियों, “लेकिन अब ज़ुल्म की मीआद के दिन थोड़े हैं, इक ज़रा सब्र कि फ़रियाद के दिन थोड़े हैं” के जरिए सत्ता को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि योगी सरकार सच का गला घोंटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि पुलिस उनके शरीर को तो कैद कर सकती है, लेकिन उनके आजाद खयालों और संघर्ष के जज्बे पर पहरा नहीं लगा सकती। लारी ने स्पष्ट किया कि चाहे जेल मिले या नजरबंदी, निर्दोषों को इंसाफ दिलाने की लड़ाई किसी भी कीमत पर जारी रहेगी और जनता के हक की आवाज दबेगी नहीं।

​पुलिस की यह कार्रवाई केवल सलेमपुर तक सीमित नहीं रही। जिले भर में धरपकड़ और नजरबंदी का दौर चला, जिसमें सपा जिलाध्यक्ष व्यास यादव, पूर्व राज्यसभा सांसद कनकलता सिंह, तेज प्रकाश जायसवाल और रामपुर कारखाना विधानसभा अध्यक्ष परमहंस यादव सहित करीब दो दर्जन प्रमुख पदाधिकारियों को उनके घरों से बाहर निकलने नहीं दिया गया। सपा नेताओं का कहना है की प्रशासन की इस अघोषित इमरजेंसी जैसी कार्रवाई ने जिले में तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है। सपाई खेमे में इस नजरबंदी को लेकर भारी आक्रोश है और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया जा रहा है।

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