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गैस सिलेण्डर की अवधि को लेकर शहर और गांव में भेदभाव, भाकियू ने उठाये सवाल : रिपोर्टर – सरताज आलम
ख्वाजा एक्सप्रेस दैनिक समाचार पत्र पोर्टल यूट्यूब चैनल - शोहरत गढ़ सिद्धार्थनगर। गैस सिलेण्डर की अवधि को लेकर शहर और गांव में भेदभाव, भाकियू ने उठाये सवाल। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिला संरक्षक अरविन्द कुमार शुक्ला ने गैस सिलेण्डर की उपयोग अवधि के मानकों को लेकर सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल खड़े किये हैं। उन्होंने सरकार से पूछा है कि क्या एक गैस सिलेण्डर वास्तव में 45 दिनों तक चल सकता है? श्री शुक्ला ने सरकार की दोहरी नीति पर प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान मानकों में शहर के लिए 25 दिन और गांव के लिए 45 दिन की अवधि तय की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या एक ही सिलेण्डर शहर में 25 दिन और गांव में 45 दिन चलेगा? शहर और गांव के उपभोक्ताओं के बीच इस तरह का भेदभाव क्यों किया जा रहा है? क्या ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों की जरूरतों को कमतर आंका जा रहा है? उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर गांवों के साथ इस तरह का सौतेला व्यवहार हो रहा है, तो क्या यही सरकार के 'विकसित भारत' का असली स्वरूप है? किसान यूनियन ने मांग की है कि सरकार इस विसंगति को दूर करे और ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को समझते हुए न्यायसंगत नीतियां बनाएं। "गांव का किसान और मजदूर भी उसी हक का अधिकारी है जितना शहर का निवासी। हम इस भेदभाव को कतई स्वीकार नहीं करेंगे।





