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भोजशाला महाआरती को लेकर धार में अलर्ट पर प्रशासन, मुस्लिम समाज घरों में पढ़ेगा नमाज

धार। मध्यप्रदेश के धार में भोजशाला को लेकर इंदौर उच्च न्यायालय के फैसले के बाद शुक्रवार को पहली बार हिंदू समाज की ओर से यहां महाआरती का आयोजन किया जा रहा है, जबकि मुस्लिम समाज ने शांतिपूर्ण विरोध स्वरूप घरों में नमाज अदा करने का फैसला किया है। अधिकारियों ने बताया कि शहर में एहतियात के तौर पर उच्च सतर्कता बरती जा रही है। पिछले 23 साल में यह पहला अवसर है जब शुक्रवार के दिन भोजशाला परिसर में नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। आज सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंच रहे हैं।

दोपहर एक बजे आयोजित महाआरती में भी बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। इस बीच, भोजशाला में नमाज को लेकर जारी विवाद के बीच मुस्लिम समाज ने भी शांतिपूर्ण विरोध का ऐलान किया है। मुस्लिम समाज के सदर अब्दुल समद ने कहा कि समाज के लोग संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपने घरों के आंगन में नमाज अदा करेंगे। उन्होंने कहा कि विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधी जाएगी तथा बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखे जाएंगे। समद ने कहा कि मुस्लिम समाज किसी सार्वजनिक स्थान पर नमाज नहीं पढ़ेगा और किसी की आस्था को ठेस पहुंचाने का प्रयास नहीं करेगा।

उन्होंने प्रशासन द्वारा हाल में उठाए गए कदमों का स्वागत करते हुए सभी समुदायों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने बताया कि गर्भगृह के आसपास रंगोली सजाई गई है और परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु शांतिपूर्ण माहौल में दर्शन और पूजन कर रहे हैं। उधर, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने भोजशाला सहित पूरे शहर में दो हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को शहर के मुख्य मार्गों में फ़्लैग मार्च निकाला।

धार के पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने बताया कि शहर में शांति का माहौल है और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी भ्रामक अथवा आपत्तिजनक पोस्ट पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने विगत शुक्रवार को भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर करार दिया था, जिसके अगले ही दिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने शनिवार को हिंदू समुदाय को पूजा-अर्चना और अन्य गतिविधियों के लिए स्मारक में निर्बाध प्रवेश की अनुमति दे दी।

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने अपने फैसले में एएसआई के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया था, जिसके तहत हिंदुओं को केवल मंगलवार को पूजा की अनुमति दी गई थी तथा मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी।

ग्यारहवीं शताब्दी के इस स्मारक की धार्मिक प्रकृति को लेकर विवाद उस समय उत्पन्न हुआ था जब मुस्लिम पक्ष ने इसे कमाल मौला मस्जिद बताया, जबकि हिंदू पक्षकारों का कहना था कि यहां परमार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित मंदिर था जिसे अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के दौरान ध्वस्त कर दिया गया।

मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा की है। अदालत के फैसले के बाद पहले मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यहां पूजा अर्चना की थी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने सरस्वती वंदना की, हनुमान चालीसा का पाठ किया, मिठाइयां बांटी, पटाखे छोड़े, शंख बजाए और हवन कीर्तन भी किया।

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