शिवसेना UBT को बड़ा झटका : प्रवक्ता आनंद दुबे ने दिया इस्तीफा, कहा- वोट चोरी नहीं, कुछ लोगों का दिमाग चोरी हो गया

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) से इस्तीफा देने के बाद आनंद दुबे ने पार्टी के रुख और विपक्ष के चुनावी आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से उन्होंने पार्टी के लिए पूरी मेहनत की, लेकिन पिछले कुछ महीनों से वह पार्टी की लाइन के अनुरूप अपनी बात नहीं रख पा रहे थे। दुबे ने वीर सावरकर को अपना हीरो और भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को अपना नेता बताया।
‘बहुत दुखी मन से दिया इस्तीफा’
आनंद दुबे ने कहा कि उन्होंने बहुत दुखी मन से इस्तीफा दिया है। पिछले कई वर्षों से उन्होंने पार्टी के लिए तन, मन और धन से काम किया तथा पार्टी की ओर से सौंपी गई जिम्मेदारियों को निभाया। हालांकि, बीते कुछ महीनों से उनके विचार और पार्टी का रुख मेल नहीं खा रहे थे। उन्होंने कहा कि शरजील इमाम, उमर खालिद या ध्रुव राठी उनके नेता नहीं हो सकते। दुबे ने छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज को अपना आदर्श बताते हुए कहा कि वह उन्हें भगवान की तरह मानने वाले कार्यकर्ता हैं।
वीर सावरकर को बताया अपना हीरो
दुबे ने कहा कि वीर सावरकर उनके हीरो हैं, जबकि गठबंधन के कुछ नेता उनके खिलाफ टिप्पणी करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन के लोगों का रुख उनकी विचारधारा से मेल नहीं खाता। इसी वैचारिक असहमति को उन्होंने पार्टी छोड़ने की प्रमुख वजहों में शामिल बताया।
‘वोट चोरी नहीं, कुछ लोगों का दिमाग चोरी हो गया’
चुनावों में वोट चोरी के आरोपों पर भी आनंद दुबे ने विपक्ष को निशाने पर लिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार में लंबे समय तक कांग्रेस के सत्ता से बाहर रहने तथा राजस्थान में हर पांच साल में सरकार बदलने का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि इन परिस्थितियों को वोट चोरी से कैसे जोड़ा जा सकता है।
दुबे ने तंज कसते हुए कहा, ‘वोट चोरी नहीं होता है, कुछ लोगों का दिमाग चोरी हो गया है।’ उनके इस बयान को विपक्ष के चुनावी आरोपों पर सीधा हमला माना जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) से इस्तीफे के बाद दुबे के बयान ने पार्टी की विचारधारा और विपक्ष के चुनावी दावों को लेकर राजनीतिक बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।



