पंजाबराज्य

मान सरकार द्वारा बीटी हाइब्रिड नरमा और देसी कपास के बीजों पर 33 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी; खरीफ 2026 के लिए 1.25 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य तय: गुरमीत सिंह खुड्डियां

चंडीगढ़, 25 अप्रैल:–

राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और नरमा क्षेत्र का विस्तार करने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री स भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना द्वारा प्रमाणित बीटी कॉटन हाइब्रिड और देसी कपास के बीजों पर 33 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री स गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा 87 अनुमोदित बीटी कॉटन हाइब्रिड और देसी कपास की चार किस्में—एल.डी.1019, एल.डी.949, एफ.डी.के.124 और पी.बी.डी.88—में से किसी भी किस्म का चयन करने वाले किसानों को बीज लागत का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सब्सिडी के रूप में दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों ने इस सब्सिडी मॉडल को सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। पिछले खरीफ सीजन में नरमा की खेती के तहत क्षेत्र में 19 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह क्षेत्र खरीफ 2024 के 1 लाख हेक्टेयर से बढ़कर खरीफ 2025 में 1.19 लाख हेक्टेयर हो गया। उन्होंने आगे बताया कि खरीफ 2026 के लिए 1.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को नरमा खेती के अंतर्गत लाने का लक्ष्य रखा गया है।

कपास को “सफेद सोना” बताते हुए कृषि मंत्री ने किसानों से अधिक पानी की खपत करने वाली धान की फसल के स्थान पर वैकल्पिक फसलें अपनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि सब्सिडी का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल 20 अप्रैल से खोल दिया गया है।

उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे केवल पंजीकृत डीलरों से प्रमाणित बीज खरीदें और आवेदन करते समय पक्का बिल अपलोड करें। सत्यापन के बाद 33 प्रतिशत सब्सिडी सीधे लाभार्थी किसानों के बैंक खातों में भेज दी जाएगी।

यह पहल किसानों को वित्तीय राहत प्रदान करने के साथ-साथ अन्य लाभ भी देगी। इससे किसानों को वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित, उच्च उत्पादकता वाली नरमा और कपास की किस्में अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि देसी कपास और पीएयू-प्रमाणित बीटी हाइब्रिड बीजों पर सब्सिडी से पंजाब की पारंपरिक कपास पट्टी को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी।

मंत्री ने कहा कि इस सब्सिडी योजना से लागत में कमी आएगी और विशेष रूप से मालवा क्षेत्र में नरमा खेती का और विस्तार होने की उम्मीद है। उन्होंने सभी मुख्य कृषि अधिकारियों को व्यापक जागरूकता अभियान चलाने और प्रत्येक पात्र किसान के लिए ऑनलाइन पोर्टल तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि कोई भी किसान जानकारी या डिजिटल पहुंच की कमी के कारण इस योजना के लाभ से वंचित न रहे।

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराकर राज्य उत्पादकता और लाभ दोनों में वृद्धि सुनिश्चित करेगा तथा सभी कपास उत्पादकों से समय रहते पोर्टल पर आवेदन कर इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।

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