डिप्टी सीएमओ का नही छूट रहा ISWA मोह,आरोपों के बाद भी कार्यक्रमों में लगातार आते है नजर
ISWA एमआरआई डायग्नोस्टिक सेंटर में बडे हिस्सेदार के रूप में मौजूद है डिप्टी सीएमओ

संवाददाता ख्वाजा एक्सप्रेस

बरेली।जनपद में डॉक्टरों की एक विशेष संस्था इंटेलेक्चुअल सोशल वेलफेयर एसोसिएशन (ISWA) के एक कार्यक्रम के दौरान महिला पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार का मामला प्रकाश में आया है।जिसके बाद संगठन की कार्यशैली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताते चले कि संगठन ISWA के द्वारा 18अप्रैल को सुमाया रिसोर्ट में ईद मिलन समारोह आयोजित किया गया था। इसी दौरान कार्यक्रम में ISWA पदाधिकारियों के साथ साथ बड़ी संख्या में डॉक्टर तथा डिप्टी सीएमओ डॉ लईक अहमद अंसारी भी फोटो शूट कराते नजर आ रहे है। उनकी मौजूदगी में वहां एक महिला पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना होना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
पीड़िता ने बताया कि “ISWA मुस्लिम डॉक्टरों की संस्था है, जिसमें बडे बड़े अस्पतालों के लगभग 600 से अधिक डॉक्टर शामिल हैं। तथा संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में सभी डाक्टरों के साथ डिप्टी सीएमओ डॉ लईक अहमद अंसारी भी बढ चढ कर हिस्सा लेते नजर आते है। बताते चले कि संस्था में डिप्टी सीएमओ डॉ लईक अहमद अंसारी भी पूर्व में एक सक्रिय सदस्य के रूप मे कार्य करते देखे जाते थे मगर जव भी उनसे उनकी संस्था सक्रियता की जानकारी ली जाती तो वह उसको सिरे से नकार देते है। मगर फिर भी लगातार लग रहे आरोपों के बाद भी डिप्टी सीएमओ डॉ लईक अहमद अंसारी का ISWA मोह क्यो नही भंग हो रहा है। ऐसा क्या कारण हो सकता है कि डिप्टी सीएमओ डॉ लईक अहमद अंसारी ISWAके कार्यक्रमों में जाने से अपने आप को क्यो नही रोक पाते है। डिप्टी सीएमओ लईक अहमद अंसारी का ISWA मोह संस्था के प्रति लगाव के कारण है या कुछ और यह प्रश्न एसीएमओ डॉ लईक अहमद अंसारी पर एक गंभीर प्रश्न चिंह क्यो खडा करता है?
ISWA एमआरआई डायग्नोस्टिक सेंटर में बडे हिस्सेदार के रूप में मौजूद है डिप्टी सीएमओ
सूत्रों से मिली जानकारी से ज्ञात हुआ है कि ISWA संस्था जोकि एक ISWA एमआरआई डायग्नोस्टिक सेंटर पीलीभीत बायपास पर संचालित करती है उसमे अन्य बड़े हॉस्पिटल के डॉक्टरों के साथ डिप्टी सीएमओ डॉ लईक अहमद अंसारी भी एक बडे हिस्सेदार के रूप में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते है । संस्था के सभी डॉक्टर सदस्यों के द्वारा बड़ी संख्या में ISWA एमआरआई डायग्नोस्टिक सेंटर पर मरीजों को रेफर करके जांच के लिए भेजा जाता है। जिससे कही ना कही कमाई का एक मोटा हिस्सा एसीएमओ के भी जेब में जाता है।



