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630 करोड लगने के बाद भी रामगंगा बैराज योजना अधर मे लटकी, दस गुना बडा खर्च, दो लाख किसान झेल रहे नुकसान

संवाददाता ख्वाजा एक्सप्रेस 

बरेली । सपा सरकार में रामगंगा पर प्रस्तावित रामगंगा बैराज परियोजना 2011 में शुरू हुई थी। जिसकी प्रस्तावित धनराशि 332.12 करोड़ रुपये थी। लंबे समय से लटकी इस परियोजना की लागत बढ़कर करीब 3289.84 करोड़ रुपये पहुंच गई है. अब तक लगभग 630.04 करोड़ रुपये खर्च होने की बात भी सामने आ रही है। लेकिन यह परियोजना अब भी अधूरी की अधूरी है परियोजना शुरू होने पर क्षेत्र के करीब दो लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेता। बदायूं सिंचाई परियोजना निर्माण खंड, बरेली के अधिशासी अभियंता के अनुसार इस परियोजना में 470 किलोमीटर लंबी नहर और बैराज का निर्माण प्रस्तावित था। अब तक करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। 60 से 65 किलोमीटर नहर भी बन चुकी है। वर्ष 2012 तक ही इस परियोजना पर लगभग 630 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे। परियोजना से जुड़ी आपत्तियों को दूर करने के लिए जल्द केंद्रीय जल आयोग के साथ बैठक प्रस्तावित है। जिससे काम आगे बढ़ने की उम्मीद है।

अधिकारियों के मुताबिक शेष भूमि अधिग्रहण नई नीति के तहत चार गुना दर पर करीब 832.85 करोड़ रुपये में किया जाना है। साथ ही केंद्रीय जल आयोग की आपत्तियां भी अभी लंबित हैं जो देरी का प्रमुख कारण बनी हुई हैं. इस परियोजना के पूरा होने से बरेली और बदायूं के करीब 2 लाख किसानों को सिंचाई सुविधा और भूजल स्तर में सुधार का लाभ मिलना था। बहरहाल लगातार देरी से किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।

किसान एकता संघ के संगठन मंत्री डॉ. रवि नागर ने बताया कि यह परियोजना किसानों के हितों से जुड़ी है, लेकिन वर्षों से इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होने बताया कि हम सभी किसानों ने गंगा मां के समक्ष शपथ ली है कि जब तक यह परियोजना शुरू नहीं होगी, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। भारतीय किसान एकता संघ के युवा मोर्चा अध्यक्ष राजेश शर्मा ने कहा कि परियोजना अधूरी रहने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। जिन जमीनों पर पहले खेती होती थी, वहां अब अधूरी नहरें खुदी पड़ी हैं, जिससे किसान न खेती कर पा रहे हैं और न ही किसी तरह का लाभ मिल पा रहा है।।

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