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भारत की घरेलू मांग और मजबूत वित्तीय प्रणाली वैश्विक संकट के बीच कुछ हद तक प्रदान करती है सुरक्षा: इको रिव्यू

वित्त मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से आपूर्ति में भारी कमी आई है और महंगाई, व्यापार और वित्तीय प्रवाह के लिए जोखिम बढ़ रहे हैं, लेकिन भारत की मजबूत घरेलू मांग, नीतिगत सुरक्षा उपाय, मजबूत वित्तीय प्राणाली और लगातार सार्वजनिक निवेश के कारण देश को कुछ हद तक सुरक्षा मिल रही है।

हालांकि, अगर ऊर्जा और उर्वरक की आपूर्ति में लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रहती है, तो यह देखना जरूरी होगा कि ये सुरक्षा उपाय कितने कारगर साबित होते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एल नीनो दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) के कारण इस बार भारत में मानसून सामान्य से कम रह सकता है। ज्यादातर इलाकों में कम बारिश होने की संभावना है। इससे महंगाई, वित्तीय घाटा और बाहरी घाटे का जोखिम बढ़ सकता है, जबकि आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, सरकार की नीतियां आर्थिक विकास को बनाए रखने के साथ-साथ वित्तीय और बाहरी स्थिरता को भी सुरक्षित रखने की कोशिश करेंगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष 60 दिन बाद भी खत्म होता नजर नहीं आ रहा है।

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि संघर्ष में शामिल देशों के बीच मतभेद अभी भी काफी ज्यादा हैं और आपसी भरोसे की कमी के कारण बातचीत में प्रगति नहीं हो रही है।

कुछ देशों ने बढ़ती कीमतों का बोझ सीधे लोगों और व्यवसायों पर डालना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ देशों ने अभी ऐसा नहीं किया है। लेकिन यह स्थिति ज्यादा समय तक टल नहीं सकती।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आपूर्ति में कमी के समय मांग को कम करना जरूरी होता है, वरना देशों को ऊर्जा के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। भारत में कच्चे तेल की औसत कीमत मार्च में 113 डॉलर प्रति बैरल और अप्रैल में 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब रही।

अप्रैल के दूसरे सप्ताह में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपनी विश्व आर्थिक रिपोर्ट जारी की। इसमें पूरे साल के लिए तेल की कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल मानकर अनुमान लगाए गए हैं, जो मौजूदा स्थिति से थोड़ा कम नजर आते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक विकास के अनुमान नीचे जाने का खतरा ज्यादा है, जबकि महंगाई बढ़ने का खतरा ऊपर की ओर है।

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा और मजबूती पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

साथ ही, यह भी जरूरी है कि एक आयात पर निर्भरता कम करते हुए किसी दूसरे आयात पर ज्यादा निर्भरता न बढ़े। अचानक आपूर्ति रुकने का खतरा भी कम किया जाना चाहिए।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना ऊर्जा सुरक्षा और शहरों में जीवन को बेहतर बनाने में मदद करेगा। इसके लिए राज्यों के साथ मिलकर काम करना जरूरी है।

इसके अलावा, देश में नियमों को आसान बनाना और अनावश्यक कानूनों को हटाना भी जरूरी है, ताकि आयात-निर्यात सस्ता और आसान हो सके।

कृषि क्षेत्र में भी सुधार की जरूरत बताई गई है, जैसे फसलों के गलत चयन को कम करना और उत्पादन बढ़ाना।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि युवाओं को ऐसे कौशल सिखाने चाहिए जो एआई के असर से सुरक्षित रहें। इससे देश में रोजगार बढ़ेगा और निर्यात के नए अवसर भी मिलेंगे।

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