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ईरान के साथ युद्ध जारी रहने पर बढ़ सकती हैं ईंधन की कीमतें: आरबीआई गवर्नर

भारतीय रिजर्व बैक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि अगर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष लंबा चलता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों के चलते भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी भारत की महंगाई नियंत्रण नीति के लिए चुनौती बन रही है, जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक को नीतिगत कदम उठाने पड़ सकते हैं। आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति बैठक 5 जून को होने वाली है, जिसमें ब्याज दरों पर फैसला लिया जाएगा। फिलहाल आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

गवर्नर ने संकेत दिया कि अगर पश्चिम एशिया संकट जारी रहता है, तो खुदरा ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी ‘सिर्फ समय की बात’ हो सकती है। इससे परिवहन लागत और महंगाई दोनों बढ़ने की आशंका है।

अप्रैल 2026 की बैठक में आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया था और तटस्थ रुख बनाए रखा था। यह फैसला घरेलू आर्थिक विकास और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच महंगाई पर नजर बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा था।

संजय मल्होत्रा ने मंगलवार को स्विट्जरलैंड में स्विस नेशनल बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा आयोजित सम्मेलन में कहा, “हम अब आंकड़ों पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। आरबीआई अपने दृष्टिकोण में लचीलापन रख रहा है। अगर यह झटका अस्थायी है तो हम उसे नजरअंदाज कर सकते हैं, लेकिन अगर यह लंबे समय तक बना रहता है तो हमें कार्रवाई करनी होगी।”

उन्होंने कहा कि सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कमी की है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ खुद उठा रही हैं।

इस बीच, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान के कारण कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं।

पुरी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के बावजूद ईंधन कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं, जिसके कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियों को रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के उत्पादन की लागत तेजी से बढ़ जाती है।

मंत्री के अनुसार, अंडर-रिकवरी बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, जबकि जून तिमाही में अब तक नुकसान करीब 1 लाख करोड़ रुपए हो चुका है।

केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तेल कंपनियों ने एलपीजी उत्पादन को पहले के लगभग 35,000 टन से बढ़ाकर 55,000-56,000 टन प्रतिदिन कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास फिलहाल लगभग 76 दिनों की मांग के बराबर कच्चे तेल का भंडार मौजूद है।

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