सज्जादानशीन मुफ्ती असजद मियां की खुसूसी दुआ के साथ आठवां दो रोज़ा उर्स-ए-ताजुश्शरिया का समापन
बच्चियों को तालीम जरूर दे मोबाईल से रखें दूर - मुफ्ती शाहजाद आलम मिस्बाही

संवाददाता ख्वाजा एक्सप्रेस
बरेली। सुन्नी बरेलवी मुसलमानो के सबसे बड़े मजहबी रहनुमा ताजुशरिया मुफ्ती मोहम्मद अख़्तर रज़ा खां (अजहरी मियां) का आठवां दो रोज़ा उर्स की रस्मे दरगाह ताजुशारिया के सज्जादानशीन काज़ी-ए-हिन्दुस्तान मुफ्ती मोहम्मद असजद रज़ा खां कादरी (असजद मियां) की सरपरस्ती और जमात रज़ा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उर्स प्रभारी सलमान मियां की सदारत व जमात रज़ा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां की निगरानी में अदा की गई। जमात रज़ा के पूर्व मीडिया प्रभारी समरान खान ने बताया दरगाह ताजुशारिया पर बाद नमाज़-ए-फजर कुरानखानी व नात-ओ-मनकबत की महफिल सजाई गई। सुबह 07 बजकर 10 मिनट पर मुफस्सिर-ए-आज़म हिंद जिलानी मियां के कुल की रस्म अदा की गई। दिन भर दरगाह आला हजरत और दरगाह ताजुशरिया पर जायरीनों की हाजरी का सिलसिला चलता रहा। देश-विदेश आये उलमा-ए-किराम ने शिरकत परमाई। मुख्य कार्यकर्म उर्स स्थल मदरसा जामियातुर रज़ा में बाद नमाज़-ए-जोहर दोपहर 02 बजे से क़ारी रिज़वान ने क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत से उर्स के प्रोग्राम का आगाज़ किया। और मौलाना गुलज़ार रज़वी ने प्रोग्राम की निज़ामत की। असद इकबाल कोलकाता और रफीक रज़ा कादरी मुंबई ने नात-ओ-मनकबत का नज़राना पेश किया।
“मुफ्ती शाहजाद आलम मिस्बाही” ने अपनी तकरीर में कहा ताजुशशरिया ने अपनी पूरी ज़िन्दगी मज़हब व मसलक के लिए वफ़क़ कर दी। मसलक के फरोग के लिए दुनियाभर के दौरे किये। इल्म की शमा रौशन की। आज मुसलमानों को ताजुशशरिया के नक्शे कदम पर चलते हुए अपने बच्चों को दीनी व दुनियावी तालीम ज़रूर दिलाए। चाहे आधा पेट खाये लेकिन तालीम (शिक्षा) पर खास ध्यान दे। ताकि बच्चो का बेहतर मुस्तक़बिल बने। बच्चियों को तालीम जरूर दें और मोबाईल से रखें दूर। “वही मुफ्ती जाहिद रज़ा” ने कहा हुज़ूर ताजुश्शरिया आशिक-ए-रसूल और गुलाम-ए-अहलेबैत व साहिबा किराम हैं। आप का हर काम शरीयत-ए-इस्लाम के हिसाब से होता है। आप का ऐसा कोई अमल नहीं था जो शरीयत के खिलाफ हो इसलिए आपको ताजुश्शरिया (शरीयत का ताज ) कहा जाता है। आप मुफ़स्सिर-ए-आज़म हिंद के लख्त-ए-जिगर, सरकार मुफ़्ती-ए-आज़म हिन्द के सच्चे जा-नशीन, हुज्जत-उल-इस्लाम के मज़हर और सय्यदी सरकार आला हज़रत की बरकात ओ फुयुज़ात का सर चश्मा और उनके उलूम वा रिवायतों के वारिस व अमीन हैं। ताजुश्शरिया ने अरबी, उर्दू, अंग्रेजी आदि भाषाओँ में किताबे लिखीं जिनकी तादाद सौ से ज़्यादा हैं और आपने लाखों फतवों सादिर फरमाए। आपने आला हज़रत की कई किताबों को अरबी में अनुवाद करके अरब देशों तक पहुंचाया। आला हजरत के मिशन को आगे बढ़ाया। आपने अरबी, उर्दू भाषाओँ में नातों मनकबत लिखीं। “काल्पी के सज्जादाशीन सैय्यद गियास मिया” ने कहा कल भी बरेली शरीफ मरकज़ था और आज भी मरकज़ है और कल क़यामत तक मरकज़ रहेगा हम किसी मनमानी की नहीं मानते हम सिर्फ काजी-ए-हिन्दुस्तान मुफ्ती मुहम्मद असजद रजा़ खां का़दरी को अपना रहबर वा काईद मानते हैं। देश-विदेश से आए उलमा-ए-इकराम और सज्जादागान में घोसी शरीफ़ से मुहद्दिस-ए-कबीर जिया उल मुस्तफा, मुफ्ती आशिक हुसैन कश्मीरी, बगदाद शरीफ शेख उमर अल बगदादी, साउथ अफ्रीका के अफ्ताफ कासिम साहब, काज़ी-ए-शहर मऊ मुफ्ती शमशाद, रामपुर से काज़ी-ए-शहर मुफ्ती फैजान मिया, बिलग्राम शरीफ के सज्जादानशीन सोहिल मियां और अनस मिया, काज़ी-ए-शहर अयोध्या फैजाबाद से मौलाना अब्दुल मुस्तफा रुदौली, जमदाशाही से मुफ्ती अख्तर अलीमी, मुफ्ती शमशाद मिसवाई, मुफ्ती कफील हाशमी, सफीपुर के सज्जादानशीन हसनैन मियां, मुफ्ती नश्तर फारुकी, मुफ्ती अफज़ाल रजवी, आदि लोगो ने हुज़ूर ताजुशशरिया की जिदंगी पर रौशनी डाली। मदरसा जामियातुर रज़ा में लाखों लोगों ने असर और मगरिब की नमाज़ अदा की। इसके बात शाम को 07 बजकर 14 मिनट पर हुजूर ताजुशरिया के कुल शरीफ़ की रस्म अदा की गई। फातिहा फैजू नबी और कारी शरफुद्दीन और शिजरा शरीफ़ मुहद्दिस-ए-कबीर जिया उल मुस्तफा ने दुआ काज़ी-ए-हिन्दुस्तान सज्जादानशीन मुफ्ती मोहम्मद असजद रज़ा खां कादरी ने देश में अमन-ओ-अमान और फिलस्तीन के मुसलमानों की हिफाजत के लिए खुसूसी दुआ की। इसी के साथ दो रोज़ा उर्स का समापन हो गया।
पूरे विश्व भर में मनाया गया उर्स-ए-ताजुश्शरिया
दरगाह आला हजरत, दरगाह शाहदाना वाली, दरगाह नसीर मिया, के अलावा सभी छोटी बड़ी दरगाह व खानकाहों और शहर से लेकर देहात तक की सभी छोटी बड़ी मस्जिदों व अपनी दुकानों व घरों में उर्स-ए-ताजुश्शरिया मनाया और नियाज़-ओ-नजर की।
ऑनलाइन के माध्यम से भी उर्स में जुड़े लाखों जायरीन
जमात रज़ा के आईटी सेल प्रभारी अतीक अहमद ने बताया जो जायरीन किसी कारण अपने पीर की मोहब्बत में उर्स पर नहीं पहुंच पाए बरेली शरीफ़ वह लोग ऑनलाइन के मध्यम से उर्स में जुड़े। और उर्स की मुबारकबाद दी। विश्व भर में लाखों लोगों ने मिक्सर और यू ट्यूब पर उर्स का लाइव प्रसारण सुना। 24 वा 25 अप्रैल को लाइव प्रसारण पूरे विश्व में किया गया था। उर्स का लिंग सोशल मीडिया 21 अप्रैल को जारी कर दिया गया था।
जमात रज़ा-ए-मुस्तफा की इन ब्रांचों का उर्स पर बड़ा रहा सहयोग
उर्स कोर कमेटी के सदस्य यासीन रज़ा खान ने बताया आठवां उर्स के मौके पर दरगाह हजरत से जुड़े संगठन जमात रज़ा-ए-मुस्तफा की इन सभी ब्रांचो का बानखाना, फतेहगंज, फतेहगंज पूर्वी, बहेड़ी, शेरगढ़, शाही, करगैना, मिलक, पूरनपुर, बीसलपुर, चंद्रपुर बिचपुरी, फाइक इन क्लैव, अलीगंज, खैलम, आंवला, महेशपूरा, अटरिया, विधौलिया आदि ब्रांचो के सदर व उनके वॉलिंटियर जायरीनों की खिदमत में दो दिन लग रहे। खाने का लंगर, ठंडे पानी का इंतजाम, चाय का इंतजाम, शरबत का इंतजाम, ट्रैफिक की व्यवस्था, स्टेज की व्यवस्था आदि में बड़ा सहयोग रहा।
इस दौरान उर्स की व्यवस्थाओं में हाफिज इकराम रजा खां, डॉक्टर महेंदी हसन, शमीम अहमद, समरान खान, कौसर अली, यासीन खान, मोईन खान, सय्यद अज़ीमुद्दीन अज़हरी, अब्दुल्ला रज़ा खां, मोईन अख्तर, मौलाना आबिद नूरी, नदीम सुब्हानी, नावेद आलम, गुलाम हुसैन, रेहान अली, बक्तियार खान, सैफ रज़ा खां कादरी, जुनैद रज़ा, शाईबउद्दीन रजवी, मौलाना निजाम, एडवोकेट राशिद खान, अली रज़ा, फैज़ान अहमद अमन रज़ा, रहबर रज़ा खां, शाहबाज खान आदि का बड़ा सयोग रहा ।।



