शोर गिरिया है कूफे में बरपा उठ रहा है जनाजा अली का…
हजरत अली की शहादत की याद में निकला ताबूत का जुलूस

लखनऊ। ‘शोर गिरिया है कूफे में बरपा उठ रहा है जनाजा अली का, रो रहा है नबी का घराना उठ रहा है जनाजा अली का’। अमीर-उल-मोमेनीन हजरत अली (अ.स) की शहादत की याद में बुधवार को इमाम के ताबूत का जुलूस रौजाए शबीहे नजफ रुस्तम नगर से निकाला गया जो कर्बला तालकटोरा जाकर समाप्त हुआ। ताबूत को कत्लगाह में या अली मौला-हैदर मौला की सदाओं के बीच दफ्न किया गया। इसी के साथ तीन दिन से चल रहा गम खत्म हुआ। जुलूस के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतिजाम किये गये थे। 19वीं रमजान को जब हजरत अली नमाज पढ़ने के दौरान सजदे में थे तो अब्दुर्रहमान इब्ने मुल्जिम ने उनके सर पर जहर से बुझी तलवार से हमला किया था। जिससे वह जख्मी हो गये थे और 21वीं रमजान को उनकी शहादत हो गयी थी।

जुलूस की अलविदाई मजलिस को मौलाना यासूब अब्बास ने सुबह 3 बजे खिताब किया। मात्र 15 मिनट की मजलिस के बाद औरतों ने ताबूत को पुरुषों को सौप दिया। ताबूत देखते ही अजादार गिरिया करने लगे, हर आंख से आंसू गिरने लगे, कोई सर पीट रहा था तो कोई सीना। जुलूस में हजरत अब्बास (अ.स) के अलम भी थे। ताबूत निकलने के रास्तों पर बड़ी तादाद में अजादार पहले से ही जियारत के लिए ताबूत का का इंतजार कर रहे थे। बस सबको यही फिक्र थी कि ताबूत कहा पहुंचा, यहां कब आएगा। ताबूत आते ही हर आंख अश्कबार हो जाती थी लोग अपने हाथ जोड़कर अपने मौला से गिरया कर रहे थे। ताबूत आगे निकलता अकीदतमंद आसुओं के साथ ताबूत के पीछे चलने लगते। ताबूत में एक लाख से अधिक लोगों का हुजूम था जिसमें पुरूष, महिलाएं व बच्चे नंगे पैर इमाम की शहादत के गम में आंसू बहाते चल रहे थे। रोजा होने के बावजूद अजादार अपने मौला के ताबूत को चूमने व कंधा देने के लिए बेकरार थे। कर्बला तालकटोरा में मौलाना अब्बास नासिर ने मजलिस को खिताब किया।
इन इलाकों से गुजरा जुलूस
जुलूस छोटे साहब आलम रोड, कर्बला दियानुतदौला, काजमैन, मंसूर नगर तिराहा, गिरधारी सिंह इंटर कालेज, संजीवनी अस्पताल से दाहिने मुड़कर हैदरगंज पहुंचा। जहां आयोजकों ने परम्परा के मुताबिक कुएं के पास कुछ पलों के लिए ताबूत को रोककर काली चादर चढ़ायी और फिर ताबूत कर्बला तालकटोरा पहुंचकर दफ्न होते ही हैदर मौला या अली मौला की सदाएं गूंजने लगी। लोगों ने दिनभर कर्बला तालकटोरा पहुंचकर हजरत अली की तुरबत पर फातेहा पढ़ा। अंत में मौलाना अब्बास नासिर ने मजलिस को खिताब किया। इस मौके पर तालकटोरा में रोजा अफ्तार कराया गया।
घरों में महिलाओं ने पेश किया पुरसा
हजरत अली (अ.) की शहादत की याद में हर घर मजलिसें हुईं और ‘हैदर मौला-या अली मौला कि सदाएं गूंजती रही। अजादार काले लिबास पहन एक मजलिस से दूसरी मजलिस में शामिल हुए। वहीं महिलाओं ने घरों में नौहाख्वानी की। किसी ने यह नौहा पढ़ा ‘या मुस्तफा अली के जनाजे पर आइये, अपने वसी का धूम से लाशा उठाइये, बच्चों के सर से बाप का साया भी उठ गया, नुसरत को अब यतीमों की तशरीफ लाइये”। तो कही यह नौहा ‘रोके देती है जैनब दुहायी, घर से जाती है हैदर की मय्यत, आज हम पर यतीमी है छायी घर से जाती है हैदर की मय्यत” पढ़ा। घरों में रखे ताबूतों को भी उठाया और काजमैन में दफ्न किया गया।

बेटी व बेटे के घर बाप का पुरसा दिया
कर्बला दियानुतदैला में ‘बेटी के घर बाप का पुरसा” शीर्षक से आयोजित मजलिस को निगार फातिमा ने खिताब किया। वही बेटे के घर बाप का पुरसा शीर्षक से मौलाना मोहम्मद मिया आब्दी ने मजलिस को खिताब किया। छोटे इमामबाड़े में अमीरुल मोमिनीन का मातम शीर्षक में मौलाना अली इमाम ने मजलिस को खिताब किया। मस्जिद मिर्जा जैना में हसन रजा ने मर्सिया पढ़ा। फराशखाना वजीरगंज में शहजादी को उनके शौहर का पुरसा शीर्षक से आयोजित मजलिस को मौलाना गुलरेज नकी ने खिताब किया। दरगाह हजरत अब्बास रुस्तम नगर में मौलाना सैफ अब्बास ने मजलिस को खिताब करते हुए हजरत अली की शहादत को बयान किया। इमामबाड़ा लाडोखानम नक्खास में नेशनल हुसैनी कॉन्फ्रेंस की ओर से आयोजित मजलिस को मौलाना दानिश जैदी ने मजलिस को खिताब किया।
नज्रों का आयोजन
हजरत अली की शहादत की याद में मगरिब की नमाज के बाद शहर के इमामबाड़ों, कर्बलाओं व घरों में खड़ी मसूर की दाल-चावल पर नज्रों का भी आयोजन किया गया। रोजा अफ्तार के बाद घर के बुजूर्गों ने नज्रे मौला अली दी और उसके बाद नज्र चखी गयी।
आमाल-ए-शबे कद्र आज
बृहस्पतिवार को शबे कद्र के मौके पर को शिया पूरी रात अल्लाह की इबादत में गुजारेंगे। जहां पुरूष मस्जिदों में अमाल ए शबे कद्र और नमाजे अदा करेंगे, वहीं महिलाएं घरों में आमाल करेंगी और छह दिन क नमाजे पढ़ेगी। शबे कद्र के मौके पर मस्जिदों में अफ्तारी के साथ-साथ सहरी के विशेष इंतेजाम किये गये हैं।
हजरत अली के शहादत दिवस पर राष्ट्रीय छुट्टी की मांग
आल इण्डिया शिया यूथ फेडरेशन ने 21 रमज़ान को हजरत अली (अ.स) की शहादत दिवस पर भारत सरकार से राष्ट्रीय छुट्टी की मांग की। इस मौके पर फेडरेशन के महासचिव कासिम हुसैन ने बताया कि ये मांग करीब 28 वर्षों से की जा रही है । आज कर्बला तालकटोरा के पास हजारों अजादारों ने कपड़े पर हस्ताक्षर कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा गया।



