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यूपी बन रहा है AI‑स्किल्ड प्रदेश: शिक्षा से लेकर सुरक्षा और प्रशासन तक, योगी सरकार कर रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग

लखनऊ : उत्तर प्रदेश अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में देश का अगुवा बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने AI को शिक्षा, सुरक्षा, कृषि, प्रशासन और उद्योग के हर क्षेत्र में तेजी से एकीकृत किया है। भारत की पहली AI‑ऑगमेंटेड मल्टीडिसिप्लिनरी यूनिवर्सिटी का उद्घाटन, जो चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी द्वारा उन्नाव में स्थापित की जा रही है, इसका सबसे ताजा और सशक्त उदाहरण है। यह कदम सिर्फ एक यूनिवर्सिटी का निर्माण नहीं, बल्कि उस AI-स्किल्ड यूपी की नींव है, जो आने वाले वर्षों में तकनीकी मानव संसाधन का राष्ट्रीय और वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

AI प्रज्ञा से हर नागरिक को डिजिटल रूप से दक्ष बनाने का संकल्प

उत्तर प्रदेश सरकार की फ्लैगशिप योजना AI प्रज्ञा के तहत, Microsoft, Intel, Google, Guvi जैसे टेक दिग्गजों के सहयोग से 10 लाख युवाओं, शिक्षकों, ग्राम प्रधानों, सरकारी कर्मियों और किसानों को AI, डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। हर महीने 1.5 लाख लोगों को ट्रेंड करने की योजना है। छह प्रमुख विभागों (शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ग्राम्य विकास, राजस्व, सचिवालय प्रशासन) को विशेष रूप से शामिल किया गया है। प्रशिक्षण में इंडस्ट्री-रेडी सर्टिफिकेशन भी दिया जा रहा है।

महिला सुरक्षा में AI की ताकत

AI अब सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। प्रदेश के 17 नगर निगमों में सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत AI-सक्षम सीसीटीवी कैमरे, नंबर प्लेट रिकॉग्निशन, SOS अलर्ट, फेशियल रिकग्निशन जैसे फीचर्स लागू किए गए हैं। महिला, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों की सुरक्षा के लिए 24×7 मॉनिटरिंग की जा रही है तो 112 हेल्पलाइन और पुलिस कंट्रोल रूम से सीधा इंटीग्रेशन किया गया है।

UP-AGRIS प्रोजेक्ट से स्मार्ट खेती को बढ़ावा

₹4,000 करोड़ की लागत से शुरू किया गया UP‑AGRIS प्रोजेक्ट विश्व बैंक के सहयोग से राज्य के 10 लाख किसानों तक AI‑आधारित खेती के मॉडल पहुंचा रहा है। स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन मैपिंग, कीट पहचान जैसे टूल्स उपयोग में लाए जा रहे हैं। इससे 10,000 महिला समूहों को भी जोड़ा गया है, जबकि किसान उत्पादक संगठनों को डिजिटल मार्केट एक्सेस मिल रहा है।

प्रशासन और न्याय में भी AI का दखल

राजस्व विभाग में चकबंदी और भूमि अभिलेखों के लिए सैटेलाइट इमेजिंग और AI एल्गोरिद्म का उपयोग हो रहा है। पारदर्शी, तेज और विवाद रहित भूमि वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है तो गांव स्तर पर डिजिटल मैपिंग संभव हो रही है। साथ ही, राज्य की 70 जेलों में AI आधारित निगरानी प्रणाली ‘Jarvis’ लगाई गई है, जो हर कैदी की गतिविधि पर निगरानी रखती है। यह जेल प्रशासन में तकनीकी पारदर्शिता की दिशा में एक अनोखा कदम है।

AI आधारित चेकगेट्स से रोका जा रहा अवैध खनन

भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने खनन क्षेत्रों की निगरानी को और मजबूत करने के लिए कई तकनीकी उपाय किए हैं। खनन क्षेत्रों की जियो-फेंसिंग, कैमरा युक्त वेट-ब्रिज और वाहनों पर RFID टैग के जरिए खनिज परिवहन पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, 25 जनपदों में 57 मानव रहित IoT/AI (इंटरनेट ऑफ थिंग्स/आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित चेकगेट्स स्थापित किए गए हैं, जिन्हें निदेशालय के कमांड सेंटर से एकीकृत किया गया है।

AI के तहत ये भी किए गए काम

  • फतेहपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट केंद्र स्थापना की गई है, जो देश में इस तरह का पहला केंद्र है।
  • उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा एक्सप्रेसवे की राइडिंग क्वालिटी और कम्फर्ट में सुधार के लिए वाइब्रेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित ईटीएच यूनिवर्सिटी ज्यूरिख स्विट्जरलैंड की तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल किया गया।
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरक्षी नागरिक पुलिस सीधी भर्ती-2023 परीक्षा निष्पक्ष, पारदर्शी और सकुशल संपन्न कराने के लिए भी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की मदद ली। एआई के जरिये 15 हजार प्रश्नों का एक विशाल प्रश्न बैंक तैयार किया था, जिसे परीक्षा के दौरान रैंडमाइजेशन किया गया था।
  • फार्मा रिसर्च और हेल्थ डाटा का सही इस्तेमाल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी तकनीक को अपनाया जा रहा है।
  • सीएम योगी के विजन को धरातल पर उतारने के लिए आईबीएम अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ‘स्टेट ऑफ द आर्ट सॉफ्टवेयर लैब’ की जल्द ही लखनऊ स्थापना करने जा रही है। यह एआई-संचालित नवाचार व उपयोग को गति देगा जो उत्पादकता व दक्षता को बढ़ाएगा व नागरिक सेवाओं में सुधार लाने का माध्यम बनेगा।

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