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राम मंदिर में चढ़ावे से लेकर ‘ट्रस्ट’ तक पर सवाल! करोड़ों के घोटाले ने क्यों हिला दी सबसे बड़ी धार्मिक संस्था? जानिए पूरी टाइमलाइन

22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि कुछ ही वर्षों में मंदिर में आए चढ़ावे को लेकर अनियमितताओं का मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन जाएगा। करोड़ों रुपये के दान में हेराफेरी के आरोपों के बाद अब यह मामला केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट लगातार कह रहा है कि कई आरोप भ्रामक हैं और वह जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।

राम मंदिर आंदोलन से मंदिर निर्माण तक का सफर

भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद के लिए राम मंदिर आंदोलन लंबे समय तक प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रहा। 1984 में आंदोलन की शुरुआत, 1990 की रथ यात्रा, 1992 की बाबरी ढांचा घटना और 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर का उद्घाटन हुआ।

दान प्रबंधन पर कैसे खड़े हुए सवाल?

मंदिर बनने के बाद श्रद्धालुओं की भारी संख्या में आमद हुई और दान भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। इसी बीच चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आए, जिसके बाद मामला राजनीतिक विवाद के साथ-साथ जांच एजेंसियों तक पहुंच गया।

राम मंदिर दान प्रकरण: पूरी टाइमलाइन

7 जून 2026

समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण ‘पवन’ पांडेय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि राम मंदिर के दानपात्रों से लगभग 5 से 7.5 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी हुई है। आरोपों के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई।

10 जून 2026

भाजपा की ओर से भी कहा गया कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सरकार ने जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही।

13 जून 2026

उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच टीम का नेतृत्व लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत और आईजी किरण एस. को सौंपा गया।

15 जून 2026

SIT अयोध्या पहुंची और मंदिर परिसर से दस्तावेज, रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू हुई।

17 जून 2026

ट्रस्ट ने बताया कि नियमित ऑडिट के दौरान नकदी और कुछ सामग्री में गड़बड़ी का संदेह हुआ था। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की गई।

SIT की जांच में लगभग 70 संदिग्ध घटनाएं चिन्हित होने की बात सामने आई। जांच के दौरान कुछ फुटेज में कथित तौर पर काउंटिंग कर्मियों को नोटों की गड्डियां कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते हुए देखा गया। जांच एजेंसियों के अनुसार कथित तौर पर सीसीटीवी के ब्लाइंड स्पॉट और फ्रिस्किंग व्यवस्था की कमजोरियों का भी फायदा उठाया गया।

20 जून 2026

जांच के दायरे में बड़ी संख्या में लोगों से पूछताछ शुरू हुई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार करीब 150 लोगों से पूछताछ की गई।

25 जून 2026

दान चोरी मामले में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में ट्रस्ट से जुड़े कुछ कर्मचारियों के नाम भी सामने आए।

26 जून 2026

पुलिस ने अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रामशंकर यादव (टिन्नू), सुभाष श्रीवास्तव, करुणेश पांडे और रामशंकर मिश्रा को गिरफ्तार किया।

छापेमारी में 79.85 लाख रुपये से अधिक नकदी, विदेशी मुद्रा, सोने-चांदी के आभूषण और ‘राम राज्य कोष’ लिखा एक दानपात्र बरामद होने की जानकारी दी गई। बरामद नकदी में सबसे अधिक 20.40 लाख रुपये अविनाश शुक्ला के पास से मिलने का दावा किया गया।

27 जून 2026

जांच एजेंसियों ने बताया कि उपलब्ध सीसीटीवी रिकॉर्ड लगभग 45 दिन पुराना था, जिससे कथित अनियमितताओं की शुरुआत का सटीक समय निर्धारित करना चुनौती बना हुआ है।

27-30 जून 2026

SIT ने ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के बयान दर्ज किए। विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि दोनों जांच में सहयोग कर रहे हैं और उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं है।

3 जुलाई 2026

ट्रस्ट ने कई आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दान में मिली वस्तुएं सुरक्षित हैं और कई दावे तथ्यात्मक नहीं हैं।

6 जुलाई 2026

चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दिया। ट्रस्ट ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार करते हुए कृष्णा मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया।

फिलहाल क्या है स्थिति?

वर्तमान में आठों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस और SIT कथित मनी ट्रेल, बरामद नकदी और उससे जुड़ी संपत्तियों की जांच कर रही हैं। ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने घटना को “शर्मनाक और पाप” बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

ट्रस्ट का पक्ष

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट लगातार कह रहा है कि दान में मिली कई वस्तुओं के गायब होने के आरोप तथ्यात्मक नहीं हैं। ट्रस्ट का कहना है कि सभी उपलब्ध रिकॉर्ड सुरक्षित हैं, कई दावे भ्रामक हैं और वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है। ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का वह समर्थन करता है।

पहली बार बनेगा CEO पद

जांच के बीच ट्रस्ट ने मंदिर प्रबंधन को अधिक पेशेवर बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद सृजित किया गया है। इसके लिए तीन सदस्यीय चयन समिति बनाई गई है, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे शामिल हैं।

देशभर में मंदिर प्रबंधन पर नई बहस

राम मंदिर दान प्रकरण के बाद देशभर में मंदिरों में आने वाले दान, उनकी निगरानी व्यवस्था, ऑडिट सिस्टम और ट्रस्ट प्रबंधन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। भारत में लाखों मंदिर विभिन्न धार्मिक कानूनों और ट्रस्ट अधिनियम के तहत संचालित होते हैं, ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस और तेज हो गई है।

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