Rajnath Singh in Ayodhya : संस्कृत के श्लोक भी समझें, कंप्यूटर कोड भी… राजनाथ सिंह ने बताया कैसी होनी चाहिए नई पीढ़ी की शिक्षा

अयोध्या। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश को ऐसे विद्यार्थियों की जरूरत है जो संस्कृत के श्लोकों के साथ-साथ कंप्यूटर कोड को भी समझें। वे वेदों के मंत्रों की गहराई को जानें और आधुनिक विज्ञान की भाषा को भी समझने की क्षमता रखें।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को न्याय और मीमांसा जैसे भारतीय ज्ञान-विषयों के साथ आधुनिक समाज की समस्याओं को समझने की योग्यता भी विकसित करनी चाहिए। राजनाथ सिंह ने सोमवार को अयोध्या में श्रीनारायण संस्कृत महाविद्यालय के नए भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने संस्कृत के अध्ययन को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया है।
परंपरा को वर्तमान जरूरतों से जोड़ना जरूरी
रक्षा मंत्री ने कहा कि परंपरा को संरक्षित करने का सबसे बेहतर तरीका उसे वर्तमान समय की जरूरतों से जोड़ना है। आने वाली पीढ़ी के लिए केवल अतीत को जानना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे अतीत से प्रेरणा और शक्ति लेकर भविष्य का निर्माण करना होगा। उन्होंने कहा कि वेदों से लेकर उपनिषद, दर्शन से लेकर व्याकरण, आयुर्वेद से लेकर गणित, ज्योतिष से लेकर साहित्य और न्याय से लेकर मीमांसा तक भारतीय ज्ञान-परंपरा का बड़ा हिस्सा संस्कृत के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ा है। इस परंपरा ने दुनिया की बौद्धिक विरासत को भी समृद्ध किया है।
ज्ञान को परंपरा और संस्कार बनाया
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सभ्यता की बड़ी विशेषता यह रही है कि यहां ज्ञान को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा गया। ज्ञान को परंपरा बनाया गया और उस परंपरा को संस्कार का रूप दिया गया। इसके बाद शिक्षा के माध्यम से संस्कारों को समाज के व्यवहार में उतारा गया। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की संस्कृति के पुनरुत्थान को देख रही है और अयोध्या एक बार फिर अपने प्राचीन गौरव को प्राप्त कर रही है। इस गौरव में संत परंपरा का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है।
संस्कृत में भारतीय ज्ञान-परंपरा का विशाल भंडार
रक्षा मंत्री ने कहा कि संस्कृत को केवल एक भाषा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। संस्कृत में भारत की ज्ञान-परंपरा का विशाल भंडार मौजूद है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में संतों के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की स्मृतियों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने में संतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संतों ने लोगों को अपनी संतानों की तरह प्रेम, ज्ञान और शांति का पाठ पढ़ाया।
राम मंदिर आंदोलन में संतों के त्याग को किया याद
राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के संतों ने जेल की यातनाएं सहीं और अपने प्राणों तक की आहुति दी। आज जब रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हैं, तब उन संतों को भी याद किया जाना चाहिए, जिनके त्याग और बलिदान से यह संभव हुआ। उन्होंने कहा कि अयोध्या की पुण्यभूमि पर वर्षों का संघर्ष आज भव्य रूप में सामने है और भगवान रामलला अपने घर में विराजमान हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या की संत परंपरा 500 से अधिक वर्षों से श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े विभिन्न आंदोलनों की सहयोगी रही है।



