कारोबार

तेजी से आगे बढ़ रहा भारत का यूपीआई, नए शुल्क से निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा संचालित यूपीआई भुगतान प्रणाली लेनदेन की मात्रा के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल फास्ट-पेमेंट सिस्टम है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई ने भारत में डिजिटल क्रांति को गति दी है। इसने आबादी के बड़े हिस्से को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मदद की है और डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गया है, जहां इलेक्ट्रॉनिक भुगतान रोजमर्रा के कारोबार का तेजी से महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में वार्षिक यूपीआई लेनदेन की संख्या बढ़कर 241.62 अरब हो गई, जो 2016-17 में 17.8 मिलियन थी। इसी अवधि में लेनदेन का मूल्य 7,000 करोड़ रुपए से बढ़कर 3.14 लाख करोड़ रुपए हो गया।

अब सरकार यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) शुरू किए जाने के एक दशक बाद बड़े व्यापारियों से इसके इस्तेमाल के लिए शुल्क लेने पर विचार कर रही है, जिससे लंबे समय में यह प्रणाली टिकाऊ बनी रहे और इसे जारी रखने में आ रही लागत को रिकवर किया जा सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आय का एक निश्चित और अनुमानित स्रोत बैंकों तथा भुगतान कंपनियों को साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी का पता लगाने और विवादों के समाधान में निवेश करने के लिए अधिक प्रोत्साहित करेगा। साथ ही, इससे यूपीआई के अगले चरण को विकसित करने में भी मदद मिलेगी, जिसमें संभवतः क्रेडिट लाइन उपलब्ध कराना और सीमा-पार भुगतान का विस्तार शामिल होगा।

रिपोर्ट में एक विशेषज्ञ के हवाले से कहा गया, “एशिया और ग्लोबल साउथ की कई भुगतान प्रणालियों ने यूपीआई का अध्ययन इसलिए किया है क्योंकि इसने साबित किया कि वीजा, मास्टरकार्ड या किसी विदेशी बोर्डरूम को भुगतान स्विच का नियंत्रण दिए बिना भी बड़े पैमाने पर प्रणाली का विस्तार किया जा सकता है।”

पोर्ट में फिनटेक कंपनी बिज2क्रेडिट के सह-संस्थापक और सीईओ रोहित अरोड़ा के हवाले से यह भी कहा गया है कि इतने वर्षों तक मुफ्त इस्तेमाल के बाद व्यापारियों से कुछ लागत वसूलना अपरिहार्य था।

यूपीआई नेटवर्क अब सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया, ग्रीस और उज्बेकिस्तान सहित 11 देशों में काम कर रहा है। भारतीय पर्यटक, कारोबारी यात्री और छात्र अपने भारतीय बैंक खातों से सीधे व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) भुगतान कर सकते हैं। इससे विदेशी मुद्रा पर लगने वाले मार्कअप की परेशानी खत्म होती है और अंतरराष्ट्रीय कार्ड या नकदी पर निर्भरता कम होती है। यह पहल डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इंडोनेशिया जैसे अन्य देशों में उनकी भुगतान प्रणालियों के लिए शुल्क की अलग-अलग दरें हैं, जो व्यापारी की श्रेणी और लेनदेन के आकार पर निर्भर करती हैं। इसी तरह, मलेशिया में ड्यूइटनाउ के व्यापारियों से लिया जाने वाला शुल्क बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता पर निर्भर करता है और कुछ मामलों में शुल्क में छूट भी उपलब्ध है।

रिपोर्ट के अनुसार, अन्य देशों के सामने भी मूल समस्या भारत जैसी ही थी, क्योंकि एक सुरक्षित भुगतान नेटवर्क का निर्माण और संचालन करने में लागत आती है।

Khwaza Express

Khwaza Express Media Group has been known for its unbiased, fearless and responsible Hindi journalism since 2008. The proud journey since 16 years has been full of challenges, success, milestones, and love of readers. Above all, we are honored to be the voice of society from several years. Because of our firm belief in integrity and honesty, along with people oriented journalism, it has been possible to serve news & views almost every day since 2008.

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button