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दलित बस्ती में फैली बीमारी से दहशत, ग्रामीणों का प्रदर्शन; स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप

अजीत यादव

नेबुआ नौरंगिया, कुशीनगर ।

विशुनपुरा विकास खंड के ग्राम सभा पिपरा बुजुर्ग की दलित बस्ती में उल्टी-दस्त और तेज बुखार की बीमारी फैलने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बीते एक सप्ताह के भीतर करीब एक दर्जन बच्चे बीमार पड़ गए हैं। गांव में फैली गंदगी, जाम नालियां और बदहाल जलनिकासी व्यवस्था को लेकर नाराज ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर ग्राम पंचायत, स्वास्थ्य विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।

 

ग्रामीणों के अनुसार दानिश (8), कार्तिक (2), नसीम (4) और समीना (3) उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं, जबकि आयुष (5), रिजवान (4), रहमान (4), अमृष (3 माह) और अमीना (3) समेत कई बच्चों को तेज बुखार की शिकायत है। सभी बच्चों का इलाज चौराहा और पडरौना के निजी अस्पतालों में कराया जा रहा है।

 

ग्रामीण मनान अंसारी, अब्दुल लतीफ, भोला, मोतीलाल, सुरेश, ललन, केयाशी, वृक्षा, कुसुमी, रीना और उर्मिला ने आरोप लगाया कि गांव में बिना समुचित जलनिकासी व्यवस्था के नालियों का निर्माण कराया गया, जिससे अधिकांश नालियां जाम होकर बजबजा रही हैं। सड़कों पर गंदा पानी जमा है और जगह-जगह कूड़े का अंबार लगा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि सफाई कर्मचारी केवल खानापूर्ति कर लौट जाते हैं, जबकि गांव में न तो नियमित सफाई हो रही है और न ही दवा छिड़काव व फॉगिंग की व्यवस्था की गई।

 

आशा कार्यकर्ता कलीमुन नेशा ने भी स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह नियमित गांव जाकर बीमार बच्चों और उनके परिजनों से मिलती हैं तथा संबंधित अधिकारियों को सूचना देती हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।

 

मामले की जानकारी मिलने पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. चंद्रप्रकाश के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और बीमार बच्चों का उपचार शुरू कराया। वहीं बीडीओ अखंड प्रताप सिंह ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की तथा जाम नालियों की सफाई और गंदगी हटाने के लिए सफाई कर्मियों की टीम लगवाई। प्रशासन ने दवा छिड़काव, फॉगिंग और साफ-सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने के साथ दो दिन के भीतर जलनिकासी की समस्या दूर करने का आश्वासन दिया है।

 

हालांकि मौके पर ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच जनसमस्याओं को लेकर तीखी बहस भी हुई। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई चाहिए, ताकि बीमारी पर जल्द काबू पाया जा सके। वहीं ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दिनेश जायसवाल ने ग्रामीणों के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि खाद गड्ढे को खाली कराकर जल्द जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी।

 

 

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