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लैब से लैंड तक… सीएम योगी का मंत्र, कहा- कागजों से निकलकर अब खेतों में दिख रहा है वैज्ञानिक शोध का असर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कृषि परिदृश्य को बदलने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा बयान दिया है। लखनऊ में आयोजित ‘क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन’ के दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि अब सरकार की नीतियां केवल फाइलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि नवाचार और प्रयोगशालाओं के शोध सीधे किसानों के खेतों (लैंड) तक पहुंच रही हैं।

कृषि विकास दर में ऐतिहासिक उछाल

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की प्रगति के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर, जो कभी महज 8 प्रतिशत पर सिमटी हुई थी, अब बढ़कर 18 प्रतिशत के प्रभावशाली स्तर पर पहुँच गई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की कुल कृषि में 20 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है। 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए सीएम ने बताया कि उस समय प्रदेश के 69 कृषि विज्ञान केंद्र बंद होने की कगार पर थे, लेकिन आज वे पूरी सक्रियता के साथ किसानों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

रिकॉर्ड उत्पादन और नई तकनीक

यूपी ने उत्पादन के मामले में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं:
गेहूं: 425 लाख मीट्रिक टन का विशाल उत्पादन।
आलू: 245 लाख मीट्रिक टन के साथ प्रदेश अव्वल।
सब्जी और फल: बागवानी के क्षेत्र में भी लंबी छलांग लगाई गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होने से कुछ क्षेत्रों में उत्पादन 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुँच गया है। साथ ही, जल्द ही शुरू होने वाला ‘पोटैटो सेंटर’ आलू किसानों के लिए नई राहें खोलेगा।

सफल किसानों से प्रेरणा और प्राकृतिक खेती

सीएम योगी ने बाराबंकी के प्रगतिशील किसान राम शरण वर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि अनुभव डिग्री से बड़ा होता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे सफल किसानों को चिह्नित करें जो साल में 3-4 फसलें ले रहे हैं और उनके अनुभवों को अन्य किसानों के साथ साझा करें। मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक (Natural) और जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ लागत कम करने और तकनीक के अधिकतम उपयोग पर बल दिया।

बिजली और जागरूकता का असर

किसानों की समृद्धि का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 से 12 घंटे की निर्बाध बिजली और बढ़ती जागरूकता के कारण इटावा, औरैया और कानपुर देहात जैसे जिलों के किसान अब साल में तीन फसलें ले रहे हैं। अकेले मक्का की खेती से किसान प्रति एकड़ एक लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि किसानों का भरोसा अब तंत्र पर मजबूत हुआ है।

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