गांवों तक नहीं पहुंच सकी डिजिटल क्रांति, प्रभारी मंत्री ने शीघ्र समाधान का दिया भरोसा

आर के भट्ट
कुशीनगर।
देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा वर्षों से चलाए जा रहे डिजिटल इंडिया अभियान की तस्वीर जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी अधूरी नजर आती है। जनपद भ्रमण पर पहुंचे प्रभारी मंत्री दारा सिंह चौहान से जब ग्राम पंचायतों के अब तक पूर्ण रूप से डिजिटल न हो पाने का सवाल पूछा गया तो उन्होंने मामले में शीघ्र प्रभावी कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया। मंत्री के इस आश्वासन से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद एक बार फिर जगी है।
गौरतलब है कि वर्ष 2012 से ही ग्राम पंचायतों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने के लिए ऑप्टिकल फाइबर बिछाने का कार्य शुरू किया गया था। शासन की मंशा थी कि पंचायत भवनों को डिजिटल सेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जाए ताकि ग्रामीणों को विभिन्न प्रमाण पत्रों, ऑनलाइन आवेदनों, सरकारी योजनाओं और अन्य डिजिटल सेवाओं के लिए शहरों का रुख न करना पड़े। इसी उद्देश्य से पंचायत भवनों में कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए तथा कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति भी की गई।
हालांकि जमीनी स्थिति अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं दिखती। जनपद की अधिकांश ग्राम पंचायतें आज भी बीएसएनएल कनेक्टिविटी से वंचित हैं। जानकारी के अनुसार अब तक केवल लगभग तीन दर्जन ग्राम पंचायतों को ही नियमित डिजिटल कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सकी है। इंटरनेट सुविधा के अभाव में पंचायत भवनों में उपलब्ध संसाधनों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है और ग्रामीणों को कई सेवाओं के लिए आज भी ब्लॉक मुख्यालय अथवा कस्बों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
डिजिटल इंडिया अभियान का मूल उद्देश्य सरकारी सेवाओं को गांव स्तर तक पहुंचाना और ग्रामीणों को तकनीक से जोड़ना है, लेकिन कनेक्टिविटी की कमी के कारण यह लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हो सका है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट आधारित सेवाओं का विस्तार होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासनिक कार्यों में भी व्यापक सुधार की संभावनाएं हैं।
प्रभारी मंत्री दारा सिंह चौहान ने इस संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप ग्राम पंचायतों को डिजिटल सुविधाओं से जोड़ना प्राथमिकता में है और इस दिशा में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए शीघ्र प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के आश्वासन के बाद अब ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वर्षों से अधूरा पड़ा डिजिटल गांव का सपना आखिर कब धरातल पर पूरी तरह साकार हो सकेगा।



